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एचपीवी से जुड़े कैंसर को हराने के लिए लखनऊ में हुआ ‘कॉनकर एचपीवी एंड कैंसर कॉन्क्लेव 2025’, विशेषज्ञों ने दी टीकाकरण और जागरूकता पर जोर

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एचपीवी से जुड़े कैंसर को हराने के लिए लखनऊ में हुआ ‘कॉनकर एचपीवी एंड कैंसर कॉन्क्लेव 2025’, विशेषज्ञों ने दी टीकाकरण और जागरूकता पर जोर

लखनऊ: एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) से जुड़ी बीमारियों, खासतौर से सर्वाइकल कैंसर की गंभीर चुनौती का समाधान खोजने के उद्देश्य से लखनऊ में ‘कॉनकर एचपीवी एंड कैंसर कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य एचपीवी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति समाज को जागरूक करना और इससे बचाव के उपायों पर चिकित्सकीय व सामाजिक विमर्श को बढ़ावा देना था। यह कॉन्क्लेव सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय पब्लिक हेल्थ इनिशिएटिव का हिस्सा है।कार्यक्रम में देश के अग्रणी चिकित्सा विशेषज्ञों ने एचपीवी वायरस के कारण होने वाले विभिन्न कैंसरों, खासकर महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर, वलवा, वैजाइना और पुरुषों में गुदा, लिंग एवं ओरोफेरिंक्स कैंसर को लेकर विस्तार से जानकारी दी। डॉक्टरों ने बताया कि एचपीवी संक्रमण 15 से 25 वर्ष की आयु के बीच सबसे अधिक फैलता है और इसके प्रभाव से बचने के लिए समय रहते पहचान और वैक्सीनेशन अत्यंत आवश्यक है।पैनल में शामिल डॉ. अभिषेक बंसल, डॉ. संगीता मेहरोत्रा, डॉ. सौम्या गुप्ता, डॉ. सोनिया लूथरा, डॉ. आशुतोष वर्मा जैसे विशेषज्ञों ने एचपीवी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि यह वायरस केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी घातक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब भारत में कम लागत वाली और प्रभावशाली एचपीवी वैक्सीन ‘सर्वावैक’ उपलब्ध है, जिससे बड़ी संख्या में जिंदगियों को बचाया जा सकता है।सत्र का संचालन डॉ. उत्कर्ष बंसल ने किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस वैक्सीन को किशोरों और युवाओं के लिए समय पर देना एचपीवी संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में सबसे प्रभावी कदम है।सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पराग देशमुख ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि समाज के हर वर्ग—चिकित्सक, पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स, माता-पिता और शिक्षक—को इस विषय पर जागरूक बनाएं। हम रोकथाम को स्वास्थ्य नीतियों का प्राथमिक हिस्सा बनाना चाहते हैं ताकि समय रहते कार्रवाई हो और अनगिनत जिंदगियां बच सकें।”कार्यक्रम का समापन एक खुले सत्र के साथ हुआ जिसमें उपस्थित दर्शकों और विशेषज्ञों के बीच संवाद हुआ। इस दौरान ‘सही समय पर निर्णय और समाज की भागीदारी से रोके जा सकने वाले कैंसर को रोकने’ के उद्देश्य को दोहराया गया।गौरतलब है कि पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी है, जिसने वर्षों से सस्ती और असरदार वैक्सीन उपलब्ध कराकर लाखों लोगों की जान बचाई है। भारत की पहली स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन ‘सर्वावैक’ इस दिशा में उसका अहम योगदान है। यह वैक्सीन जेंडर-न्यूट्रल और क्वाड्रिवेलेंट है, जो महिला और पुरुष दोनों को दी जा सकती है।आने वाले महीनों में यह कैंपेन देश के अन्य शहरों में भी आयोजित होगा, जिससे व्यापक जनजागरूकता और ठोस समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।

   

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