
दिल्ली : वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से अब तक करोड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, लाखों लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। इस वायरस से लोगों को निजात दिलाने और वैक्सीन तैयार करने के लिए दुनियाभर के डॉक्टर जी-जान से जुटे हुए हैं। इसी बीच अमेरिका से कोरोना वैक्सीन पर बड़ी खुशखबरी आई है। अमेरिका कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के अंतिम चरण में है। संयुक्त राज्य अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 तक ट्रायल के बाद कोविड-19 वैक्सीन के 4 उम्मीदवार हो सकते हैं।
अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा उप प्रमुख पॉल मैंगो ने कहा, यह पूरी तरह से ट्रैक पर है। अगर सब कुछ सही रहा तो इस साल के अंत तक वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है। प्रत्येक वैक्सीन तीसरे क्लीनिक ट्रायल में 30,000 वॉलंटियर्स को शामिल किया गया है। वर्तमान में दोनों अंडरपास लगभग आधे थे। इसके साथ ही दावा किया गया है। कि पहले चरण के ट्रायल में इस वैक्सीन ने न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी की काफी ज्यादा मात्रा पैदा की। बुजुर्गों को वैक्सीन की खुराक देने पर उनके प्रतिरक्षा तंत्र में रेस्पॉन्स पैदा होने के सबूत मिले हैं।
हालांकि कंपनी का ये भी कहना है। कि उन्होंने इस ट्रालय में सिर्फ 20 लोगों को ही शामिल किया था। ब्रिटेन पूरी तरह से लाइसेंस प्राप्त करने से पहले किसी भी प्रभावी कोरोना वायरस वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति देने के लिए अपने कानूनों को संशोधित करने की तैयारी कर रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा। कि सरकार पुनर्निरक्षित सुरक्षा उपायों को अपना रही है। जिससे देश की दवाओं की नियामक एजेंसी को COVID-19 वैक्सीन का अस्थाई प्राधिकरण देने की अनुमति मिल जाये।
दरअसल ब्रिटेन में भी कोरोना वैक्सीन का ट्रालय आखिरी चरण में बताया जा रहा है। ब्रिटेन सरकार का कहना है। कि किसी भी वैक्सीन का ट्रायल पूरे होने के बाद उसका लाइसेंस लेने में महीनों का वक्त लग जाता है। ऐसे में अगर ये प्रक्रिया अभी से शुरू कर दी जाती है। तो लोगों को वैक्सीन जल्द उपलब्ध हो सकेगी।
जानकारी के मुताबिक, ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी ने कोरोना वैक्सीन को लगभग तैयार कर लिया है। जिसे एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के नाम से जाना जा रहा है। इस वैक्सीन का पहले और दूसरे चरण में इंसानों पर सफल परीक्षण हो चुका है। अब सिर्फ तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल बचा है। माना जा रहा है। कि यह भी जल्द ही पूरा हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने अंतिम चरण का ट्रायल दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में करने का फैसला किया है। क्योंकि यहां संक्रमितों की संख्या ज्यादा है।