
कम्युनिकेशन और तकनीक पर निर्णायक नियंत्रण जरूरी: अखिलेश यादव
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि मौजूदा युग में जब मोबाइल, जीपीएस और इंटरनेट हमारी हर गतिविधि के केंद्र में हैं, तब कम्युनिकेशन एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र बन गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास जितना ज़रूरी है, उतना ही जरूरी है उस पर सरकार का निर्णायक नियंत्रण होना, जिससे किसी भी आपातकाल या संकट की स्थिति में विदेशी कंपनियों पर नियंत्रण किया जा सके।उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में बढ़ोतरी के कारण आम आदमी से लेकर बड़ी कंपनियाँ तक लगातार ठगी और हैकिंग का शिकार हो रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में विदेशी तकनीक के प्रयोग में सतर्कता बेहद आवश्यक है। वैश्विक तकनीक का उपयोग करते समय यह तय किया जाना चाहिए कि संचालन संबंधी नियंत्रण देश के हाथ में रहे।अखिलेश यादव ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों की अस्थिरता का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी देश हमेशा के लिए किसी का स्थायी मित्र नहीं होता। राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियाँ कभी भी बदल सकती हैं, इसलिए तकनीकी निर्भरता के साथ आत्मनिर्भरता को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही देश के लिए भारी पड़ सकती है।उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह विदेशी कंपनियों को तो खुला स्वागत देती है, लेकिन देश के कारोबारियों और निवेशकों को सरकारी एजेंसियों के ज़रिये परेशान करती है। ऐसी नीति से स्टार्टअप और घरेलू निवेश हतोत्साहित होता है और देश आयात पर निर्भर होता चला जाता है। इससे व्यापार घाटा बढ़ता है और आत्मनिर्भर भारत का सपना अधूरा रह जाता है।अखिलेश यादव ने कहा कि देश की कंपनियाँ अगर केवल विदेशी एजेंट बनकर रह जाएंगी तो उत्पादन क्षमता घटेगी और बेरोज़गारी में इज़ाफा होगा। विदेशी कंपनियाँ सिर्फ़ अपने मुनाफे़ के लिए काम करती हैं, उन्हें भारत की अर्थव्यवस्था की चिंता नहीं होती। इसलिए देश को ‘अपने उत्पाद, अपनी सेवाएँ’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा।उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की संस्कृति, स्वतंत्रता, समता, स्वावलंबन, एकता, अखंडता और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा ही हमारी अर्थव्यवस्था और समाज के मूलभूत सिद्धांत होने चाहिए। इन आदर्शों को केंद्र में रखकर ही देश को प्रगति की दिशा में ले जाया जा सकता है।
