
डीजीपी प्रशांत कुमार आज होंगे रिटायर।
DGP Prashant Kumar will Retire Today:डीजीपी की कुर्सी को लेकर काउंटडाउन शुरू हो गया है. 31 मई को यूपी को नया स्थापी डीजीपी मिलेगा या वर्तमान डीजीपी प्रशांत कुमार को सेवा विस्तार या फिर कार्यवाहक डीजीपी बनाए जाने को यूपी सरकार की परंपरा जारी रहेगा. प्रशांत कुमार को सेवा विस्तार मिलने की चर्चा है. अभी आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है. सभी की निगाहें दिल्ली की ओर हैं. वहीं से मंजूरी मिलने के बाद सेवा विस्तार पर मुहर लगेगी. अगर ऐसा हुआ तो यूपी के इतिहास में पहली बार होगा कि किसी कार्यवाहक DGP को सेवा विस्तार मिलेगा. उत्तर प्रदेश से डीजी रैंक के तीन अफसरों का आज रिटायरमेंट है.

इनमें डीजी (जेल) पीवी राम शास्त्री, डीजी (टेलीकॉम) संजय एम तरडे के साथ-साथ मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार का भी 31 मई को रिटायरमेंट होना है. प्रशांत कुमार समेत डीजी रैंक के तीन अफसरों के साथ-साथ तीन डीआईजी रैंक के भी 3 अफसर, किरण यादव डीआईजी (वूमेन पावर लाइन), अरविंद चतुर्वेदी डीआईजी (विजिलेंस) और तेज स्वरूप सिंह डीआईजी (पुलिस हैडक्वाटर) का भी रिटायरमेंट है. तिलोत्तमा वर्मा की तो वह भी वर्ष 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. वर्ष 1965 में जन्मीं वर्मा मूलतः हिमाचल प्रदेश स्थित शिमला की निवासी हैं. अंग्रेजी साहित्य में बीए ऑनर्स और एलएलबी तक की पढ़ाई कर चुकीं वर्मा को वर्ष 1993 में कंफर्मेशन मिला था और वह अभी बतौर डीजी, यूपी कैडर में सेवाएं दे रहीं हैं. वर्मा, वर्ष 2005 में डीआईजी, वर्ष 2010 में आईजी, वर्ष 20145 में एडीजी और वर्ष 2024 में डीजी पद पर प्रमोट हुईं. वर्मा फिलहाल शिक्षण मुख्यालय में महानिदेशक पद पर सेवा दे रहीं हैं.
प्रशांत कुमार के स्थायी डीजीपी नहीं बन पाने की वजह सुप्रीम कोर्ट का वह निर्णय है, जिसमें यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से राज्यों के डीजीपी की नियुक्ति का प्राविधान है. इसके तहत 30 साल की सेवा पूरी कर चुके अफसरों की डिटेल यूपीएससी को भेजी जाती है. यूपीएससी उन्हीं में से बेदाग तीन अफसरों के नाम का पैनल राज्य सरकार को भेज देता है, राज्य सरकार को इन्हीं अधिकारियों में से किसी एक को डीजीपी बनाना होता है. आम तौर पर वरिष्ठता के क्रम में तीन अफसरों के नाम राज्य को भेजे जाते हैं, जिनमें से किसी एक को डीजीपी बनाए जाने की बाध्यता होती है. हितेश चंद्र अवस्थी के रिटायरमेंट के समय यूपीएससी के माध्यम से मुकल गोयल की नियुक्ति डीजीपी के पद पर हुई थी, जिन्हें राज्य सरकार ने बीच में ही हटा दिया था.