
सिद्ध शक्ति पीठ सत्य मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का दिव्य और भव्य आयोजन भक्ति, ज्ञान और कर्म का संगम।
सिद्ध शक्ति पीठ सत्य मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का दिव्य और भव्य आयोजन भक्ति, ज्ञान और कर्म का संगम।
Lucknow News:सिद्ध शक्ति पीठ सत्य मंदिर में इस वर्ष का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भक्ति, ज्ञान और कर्म के अद्वितीय संगम के रूप में सम्पन्न हुआ। यह विश्व का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान श्रीकृष्ण का “लिपि रूप” दर्शन प्रतिष्ठित है। 31 मार्च 1972 से श्रीकृष्ण चेतना अवतार देवी मां के माध्यम से भगवान स्वयं दिव्य संदेश लिपि रूप में प्रदान कर रहे हैं, और यह प्रवाह आज भी आध्यात्मिक गुरु दिव्य शक्ति मां पूनम जी एवं दिव्य शक्ति योगीराज श्री अभिनव महाराज जी के कर-कमलों से निरंतर जारी है। अब तक 400 से अधिक ‘वाणी खंड’ प्रकाशित हो चुके हैं, जिनका अध्ययन देश-विदेश में असंख्य श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन और शांति प्रदान कर रहा है।जन्माष्टमी के अवसर पर सिद्ध शक्तिपीठ सत्य मंदिर एवं विश्वात्मा मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित भव्य झांकियां सजाई गईं। इन अद्भुत सजावटों ने श्रद्धालुओं को मानो द्वापर युग में पहुंचा दिया। भगवान की अलौकिक झांकी का अनावरण दिव्य शक्ति मां पूनम जी एवं योगीराज श्री अभिनव महाराज जी ने किया।अपने प्रेरक प्रवचन में दिव्य शक्ति मां पूनम जी ने कहा भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाना केवल जन्माष्टमी मनाने से नहीं होता। सत्य और धर्म की रक्षा, प्राणीमात्र की सेवा, और अधर्म के विरोध में खड़ा होना ही सच्ची भक्ति है। SARC Development Fund के CEO डॉ. सुनील मोतीवाल ने भी अपने संबोधन में कहा यह जन्माष्टमी विशेष है क्योंकि यहां केवल भक्ति नहीं, बल्कि भगवान के उपदेशों पर आधारित कर्म की शिक्षा भी दी जा रही है जो आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आयोजन का समापन श्रीकृष्णचेतनावतार देवी मां द्वारा रचित भजनों, मंगल आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
इस अवसर ने न केवल श्रद्धालुओं को दिव्य आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया, बल्कि यह सशक्त संदेश भी स्थापित किया कि सच्ची भक्ति वही है, जो सत्य, धर्म और करुणा के कर्म में झलके।