diwali horizontal

आम आदमी की बढ़ी मुसीबतें खाने का तेल हुआ महंगा

0 219

नईदिल्ली : कोरोना काल में रोजगार के संसाधन सीमित हो जाने एवं सैलरी कटने के चलते जहां आमदनी कम हो गई है वहीं खाने पीने की चीजों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से लोगों का मंथली बजट गड़बड़ा गया है हाल ही में खाने के तेलों में हुई बढ़ोत्तरी से लोगों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं सरसों का तेल करीब 150 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है इसी तरह सोया तेल में भी इजाफा हुआ है ऐसे में एम्पॉर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर जल्दी ही खाद्य तेल में बढ़ोतरी की समीक्षा करने वाली है

सरकारी सूत्रों के मुताबिक 1 साल में खाने के तेल की कीमतों में करीब 95 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला है खाद्य मंत्रालय ने कुकिंग ऑयल की कीमतों की समीक्षा के लिए मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह को एक प्रस्ताव भेजा है और जल्द ही एक बैठक बुलाने का कहा है इसमें आयात शुल्क में कटौती का निर्णय लिया जा सकता है बता दें कि नवंबर 2020 से खाद्य तेलों पर लागू आयात शुल्क को कम नहीं किया गया है भारत खाद्य तेलों की अपनी 70 प्रतिशत मांग को पूरा करता है जिसमें प्रमुख रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल आयात होता है. उम्मीद है कि आयात शुल्क में कटौती से उपभोक्ताओं के लिए खाद्य तेलों की कीमतें कम हो सकती है

सरसों के तेल के अलावा सोयाबीन के तेल में भी वृद्धि देखने को मिली. इस साल अब तक सोयाबीन के दाम 40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. कम आपूर्ति और चीन की मांग में गिरावट ने कमोडिटी की दरों को बढ़ावा दिया है. खाद्य तेल के अनुबंधों की दरें मंगलवार को बढ़ीं. ट्रेड में रिफाइंड सोया तेल 1232 रुपए था जिसमें 0.94 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली

Leave A Reply

Your email address will not be published.