
लखनऊ : शिया समुदाय के द्वारा आज ईद ए ग़दीर का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जा रहा है। ईद ए ग़दीर के अवसर पर मस्जिदों में नमाज अदा की गई और घरों में नजरें मौला का आयोजन भी किया गया। ईद ए ग़दीर का त्यौहार शिया समुदाय में सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है और ईद ए ग़दीर के दिन शिया समुदाय के लोग नए कपड़े पहन कर खुशियां मनाने के साथ घरों में नजरें मौला का आयोजन करते हैं जिसमें खासकर सिवई और लजीज व्यंजन पकाए जाते हैं

आज से करीब 14 सौ वर्ष पूर्व हज यात्रा से वापसी के दौरान पैग़ंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने ग़दीर के मैदान में हज से वापस लौट रहे हज यात्रियों को रोक कर अपने दोस्त एवं दामाद हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए उनकी खिलाफत का एलान किया था । ग़दीर के मैदान में मोहम्मद साहब ने मेंबर पर चढ़कर ये ऐलान किया था कि मन कुंतो मौला फ़ा हाज़ा अलीयुन मौला यानी जिस जिस का मैं मौला उस उस का अली मौला

शिया समुदाय के लोगों के द्वारा ईद ए ग़दीर के इस दिन को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है । आपको बता दें कि ग़दीर के मैदान में हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के द्वारा अपना उत्तराधिकारी घोषित किए गए हज़रत अली अलैहिस्सलाम हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पिता थे। द ए ग़दीर के मौके पर लखनऊ के शिया बहुल क्षेत्र पुराने लखनऊ में सोमवार कि सुबह से ही खुशियों का दौर शुरू हो गया था। हजरत अली के मानने वालों ने जगह जगह पर सबीले लगाकर शरबत और तमाम खानपान की चीजें वितरित करना शुरू कर दिया था।
हजरत अली के चाहने वालों ने ईद ए ग़दीर के मौके पर अपने घरों पर रोशनी की और कई जगह पर सजावट भी की गई थी । ईद ए गदीर की पूर्व संध्या पर रविवार की रात कई जहां पर महफिलों का आयोजन भी किया गया था जिसमें हजरत अली की शान में कसीदे पढ़े गए थे और उनकी पाक जिंदगी पर विस्तार से प्रकाश डाला गया था । ईद ए ग़दीर के त्यौहार को हर्षोल्लास के साथ शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराए जाने के लिए पुलिस ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। शिया बहुल क्षेत्र में पुलिस फोर्स को भी लगाया गया था।
ईद ए ग़दीर का त्यौहार मोहर्रम के करीब 12 दिन पहले मनाया जाता है आज से करीब 12 दिन के बाद मोहर्रम का महीना शुरू हो जाएगा जिसमें कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का ग़म शिया समुदाय के द्वारा पूरे 2 महीने 8 दिन तक मनाया जाएगा। मोहर्रम की 1 तारीख से लेकर 10 तारीख तक शिया समुदाय के लोग 5 जुलूसों के अलावा मजलिसों का आयोजन भी करते हैं जिसमें इमाम हुसैन की याद में मातम किया जाता है। मोहर्रम शुरू होने से पहले पुलिस प्रशासन ने मोहर्रम को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए भी व्यापक तैयारियां शुरू कर दें।
आपको बता दें कि मोहर्रम की 1 तारीख को शाही ज़रीह का जुलूस निकाला जाता है मोहर्रम की 7 तारीख को शाही मेहंदी का जुलूस निकाला जाता है और मोहर्रम की 8 तारीख को अलम फतेह फुरात के जिलूस के अलावा मोहर्रम की 9 तारीख की रात शबे आशूर का जुलूस एवं मोहर्रम की 10 तारीख को यौमे आशूर का जुलूस निकाला जाता है इसके अलावा चेहल्लुम के दिन शिया समुदाय के द्वारा भी जुलूस निकाला जाता है और मोहर्रम के अंतिम दिन यानी 8 रबी उल अव्वल को चुप ताज़िए का जुलूस निकाला जाता है
सुन्नी समुदाय को 12 रबी उल अव्वल के दिन जुलूस ए मदेह सहाबा निकालने की इजाज़त है। आपको बता दें कि वर्ष 1999 में शिया, सुन्नी और प्रशासन के बीच हुए समझौते में शिया समुदाय को 9 और सुन्नी समुदाय को एक जुलूस निकालने की इजाजत सशर्त दिल गई जिसके तहत ये सभी के लिए निकाले जाते है। वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना की वजह से कोई भी जुलूस नहीं निकाला गया था।