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ऊर्जा विभाग की राजनीति पर विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ का तीखा रुख, विवादित बयान की वर्चुअल बैठक में कड़ी निंदा

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ऊर्जा विभाग की राजनीति पर विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ का तीखा रुख, विवादित बयान की वर्चुअल बैठक में कड़ी निंदा

लखनऊ: विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ, उत्तर प्रदेश के सभी घटक संगठनों की एक वर्चुअल बैठक आज दोपहर 3:00 से 4:00 बजे तक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ श्रमिक नेता एवं महासंघ अध्यक्ष आर.एस. राय ने की, जिसमें महासंघ के प्रमुख पदाधिकारी ठाकुर भूपेंद्र सिंह, मो. काशिफ, नवल किशोर सक्सेना, पुनीत राय, दिनेश सिंह भोले, विनोद कुमार, राम भूल सैनी, अमित खारी, एस.सी. बहादुर और मीडिया प्रभारी विमल चंद्र पांडे समेत सभी घटकों ने सहभागिता की।बैठक में हाल ही में संघर्ष समिति द्वारा ऊर्जा मंत्री पर दिए गए विवादित बयान की तीव्र निंदा की गई। वक्ताओं ने इसे एक पूर्व नियोजित राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सरकार और विभाग की छवि को धूमिल करना है। महासंघ अध्यक्ष आर.एस. राय ने वर्ष 2023 की तीन दिवसीय हड़ताल (16, 17 एवं 18 मार्च) का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी बिना ठोस कारण आंदोलन चलाया गया था, जिसके चलते लगभग 5000 संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त हो गई थीं। उन्होंने कहा कि वह हड़ताल ऊर्जा मंत्री और तत्कालीन अध्यक्ष एम. देवराज (IAS) जैसे ईमानदार अधिकारियों को हटाने की एक राजनीतिक चाल थी।[महासंघ प्रभारी पुनीत राय ने स्पष्ट किया कि निजीकरण विरोध के नाम पर चलाया जा रहा आंदोलन वस्तुतः कुछ लोगों के व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों को साधने का प्रयास है, कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान से इसका कोई सरोकार नहीं है।मीडिया प्रभारी विमल चंद्र पांडे ने बताया कि बैठक के अंत में सभी घटक संगठनों ने यह सामूहिक संकल्प लिया कि वे कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहेंगे और किसी भी प्रकार की राजनीतिक साजिश को सफल नहीं होने देंगे। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह रचनात्मक संवाद और ठोस समाधान की दिशा में हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा।

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