
आज की बड़ी खबर भारत के चुनावी सिस्टम से जुड़ी है, जहां पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। Bombay High Court ने ऐसा आदेश दिया है, जिसने देश की राजनीति और चुनाव प्रक्रिया दोनों में हलचल मचा दी है। कोर्ट ने पहली बार चुनाव के बाद EVM मशीनों की जांच की अनुमति दी है, जिसे कई लोग “ऐतिहासिक” और “बड़ा न्यायिक कदम” बता रहे हैं।
दरअसल यह पूरा मामला महाराष्ट्र के मुंबई की चांदिवली विधानसभा सीट से जुड़ा है। यहां 2024 के चुनाव में कांग्रेस नेता नसीम खान बहुत कम अंतर से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की और आरोप लगाया कि EVM में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए मशीनों की जांच कराई जाए। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने EVM की जांच की अनुमति दे दी।

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब तय हुआ है कि चुनाव में इस्तेमाल हुई कुछ EVM मशीनों की तकनीकी जांच यानी “डायग्नोस्टिक चेक” किया जाएगा। यह जांच मशीन बनाने वाली सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियरों की मौजूदगी में होगी। खास बात यह है कि इस जांच के दौरान उम्मीदवार, उनके विशेषज्ञ और चुनाव अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
बताया जा रहा है कि करीब 5% EVM मशीनों को जांच के लिए चुना जाएगा, जिसमें कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और VVPAT मशीन शामिल होंगी। इन मशीनों के माइक्रोचिप और मेमोरी को भी चेक किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं हुई।

इस फैसले को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि अब तक भारत के इतिहास में कभी भी चुनाव के बाद इस तरह EVM की जांच की अनुमति नहीं दी गई थी। आमतौर पर EVM को सुरक्षित रख दिया जाता था और दोबारा खोलने की इजाजत नहीं होती थी। लेकिन इस बार कोर्ट ने पारदर्शिता और भरोसे को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।
राजनीतिक तौर पर भी इस फैसले के बड़े मायने हैं। विपक्षी पार्टियां, खासकर कांग्रेस, लंबे समय से EVM को लेकर सवाल उठाती रही हैं। यहां तक कि कई बड़े नेता चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लगा चुके हैं। ऐसे में यह फैसला विपक्ष के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें अपने आरोप साबित करने का मौका मिलेगा।
हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से हमेशा यह कहा गया है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय हैं और उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है। ऐसे में अब यह जांच काफी अहम हो जाती है, क्योंकि इससे यह साफ हो सकता है कि EVM को लेकर जो शक जताए जाते हैं, उनमें कितनी सच्चाई है।
इस पूरे मामले पर अब देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। अगर जांच में सब कुछ सही पाया जाता है, तो EVM पर भरोसा और मजबूत होगा। लेकिन अगर किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो यह भारत की चुनाव प्रणाली के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है और आगे बड़े बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, Bombay High Court का यह फैसला सिर्फ एक सीट या एक चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की चुनाव प्रक्रिया पर असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह जांच क्या नतीजे देती है, इसी पर तय होगा कि EVM को लेकर चल रही बहस किस दिशा में जाएगी।