
पहली बार मुस्लिम्स-बुद्धिस्ट आए साथ साथ।
Leh News: लेह में चल रहे प्रोटेस्ट की, जहां पहली बार मुस्लिम और बौद्ध समुदाय ने एक साथ आकर समर्थन दिया है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के खत्म होने के बाद जब जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तब से यहां की राजनीति और सामाजिक समीकरण में बड़ा बदलाव आया है।

लेह, जो अब लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा है, वहां के स्थानीय लोगों ने कई मुद्दों को लेकर आवाज़ उठानी शुरू की है। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर से अलग होकर UT बनने के बाद संसाधनों, रोजगार और विकास के मुद्दे ने आंदोलन को नई ताकत दी है।

इस आंदोलन की खास बात यह है कि यहाँ पहली बार मुस्लिम और बौद्ध समुदायों ने साथ मिलकर अपने हक़ की लड़ाई लड़नी शुरू की है। इससे पहले ये दोनों समुदाय अपने-अपने ढंग से ही आवाज़ उठाते थे, लेकिन अब उनकी साझा मुहिम ने आंदोलन को और मजबूत कर दिया है। इस बदलाव को विशेषज्ञ लद्दाख में सामाजिक और राजनीतिक सामंजस्य का संकेत मान रहे हैं।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि UT बनने के बाद प्रशासन ने जो नीतियाँ बनाई हैं, वे सभी समुदायों के हितों का ध्यान नहीं रखतीं। खासतौर पर युवा बेरोज़गारी और आधारभूत सुविधाओं की कमी को लेकर जनता असंतुष्ट है। मुस्लिम और बौद्ध दोनों ही समुदायों ने मिलकर प्रशासन से बेहतर नीति बनाने की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साझा आंदोलन के चलते केंद्र सरकार और UT प्रशासन पर दबाव बढ़ा है कि वे स्थानीय जनता की मांगों को गंभीरता से लें। साथ ही, इस कदम को लद्दाख में साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लद्दाख का UT बनना यहां के सामाजिक-राजनीतिक समीकरण को बदलने वाला है। इससे पहले समुदाय अक्सर अलग-थलग रहते थे, लेकिन अब विकास के मुद्दे और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ यह साझा आंदोलन नई दिशा दे रहा है। यह बदलाव न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।