
सोलर लगवाया, फिर भी भरना पड़ रहा है हजारों का बिल उल्टा पड़ गया सारा हिसाब!
बिजली विभाग ध्यान दे:
सोलर पैनल लगवाने वाले लोग इन दिनों परेशान हैं। जिन्हें उम्मीद थी कि सोलर से बिजली सस्ती होगी या बिल से राहत मिलेगी,
वहीं अब उल्टा हो रहा है। जिन घरों में सोलर सिस्टम लगे हैं, वहां बिजली बिल आना बंद नहीं हुआ, बल्कि कई लोगों के मुताबिक बिल और बढ़ गया है।

कुछ उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि बिजली कंपनियां न सिर्फ मीटर की रीडिंग पर सवाल उठा रही हैं, बल्कि कई बार ‘नेट मीटरिंग’ का ठीक से हिसाब भी नहीं लगाया जा रहा।

यानी जितनी बिजली उन्होंने ग्रिड को वापस दी, उसका सही लाभ नहीं मिल रहा। कुछ जगहों पर तो लोगों को यह कहते भी सुना गया कि सोलर लगवाने के बाद भी हर महीने हजारों रुपये का बिल आ रहा है।

इतना ही नहीं, कई राज्यों में बिजली कंपनियां अब लोड भी बढ़ा रही हैं। यानी पहले जिस घर का कनेक्शन 2 किलोवाट था,

अब उसे 5 किलोवाट कर दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सोलर पैनल से जुड़ने के बाद कंपनियां मानती हैं कि अब उपभोक्ता की खपत भी बढ़ेगी।

लेकिन असल में कई उपभोक्ताओं के हिसाब से उनकी जरूरत पहले जैसी ही है और यह बदलाव जबरन किया जा रहा है, जिससे फिक्स चार्ज और भी ज़्यादा हो गया है।
लोग कह रहे हैं कि सरकार ने सोलर लगवाने के लिए सब्सिडी दी, योजना चलाई, लेकिन अब बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई उपभोक्ता से कर रही हैं। कुछ जगहों पर शिकायत यह भी है कि सोलर पैनल ठीक से काम नहीं कर रहा, या नेट मीटरिंग की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग समझ ही नहीं पा रहे कि आखिर उनका बिल कैसे बन रहा है।
गांवों और कस्बों में भी ऐसी ही परेशानियां सामने आ रही हैं। लोगों को लगता है कि जब उन्होंने अपनी जेब से पैसा लगाकर पर्यावरण के लिए अच्छा कदम उठाया, तो उन्हें कम से कम बिजली बिल में राहत मिलनी चाहिए थी। लेकिन हकीकत इससे उलट है।
सरकार और बिजली विभाग की ओर से अब तक इस बारे में कोई ठोस सफाई नहीं आई है। कुछ अफसरों ने इतना जरूर कहा है कि सिस्टम में सुधार की कोशिश की जा रही है, लेकिन जिन लोगों को हर महीने बिल का झटका लग रहा है, उनके लिए यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
सोलर पैनल को बढ़ावा देने के लिए जो विश्वास लोगों में जगा था, अब उस पर सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं – अगर सोलर लगवाने के बाद भी बिल भरना है, तो फिर इसका फायदा क्या?