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हृदय रोगियों को अपने हृदय के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए, उन्नत चिकित्सा तकनीकों के प्रति जागरूक बनें

- डॉ. अजय बहादुर धमनियों में कैल्शियम ब्लॉक्स के ईलाज के लिए रोटाब्लेशन की सलाह देते हैं -

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लखनऊ.  पिछले दो दशकों में, भारत में हृदय प्रणाली के रोगों का काफी प्रसार हुआ है। डॉ. अजय बहादुर, अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल में हृदय रोग विशेषज्ञ, लखनऊ, हृदय के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के महत्व तथा रोगियों के लिए हृदय की देखभाल के लिए आधुनिक तकनीकों तथा देश में आज उनके लिए उपलब्ध उन्नत तकनीकों के प्रति जागरूकता पर जोर देते हैं।

दिल की धमनी के रोग से ग्रस्त अनेक रोगियों में, अत्यधिक कैल्शिफायड कोरोनरी आर्टरी ब्लॉक्स होते हैं। हालांकि अत्याधुनिक तकनीक के बल पर इनमें से कुछ रोगी बायपास सर्जरी करवा सकते हैं, लेकिन विशेष कर अधिक उम्र के रोगियों में रुग्णता काफी अधिक होती है और इससे उन्हें ठीक होने में काफी समय लग जाता है।

 अधिकांश रोगी खराब सामान्य स्थिति, कमजोर हड्डियों तथा दूसरी अन्य रुग्णताओं जैसे खराब फेफड़े के कारण, सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं रहते हैं। ऐसे रोगियों के लिए रोटेशनल अथेरेक्टॉमी या सामान्य शब्दों में कहा जाए तो कैल्शियम को काटना अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकता है।

 इस तकनीक के लाभ पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. बहादुर कहते हैं, “रोटेशनल अथेरेक्टॉमी की सहायता से हम, अधिकांश रोगियों को बायपास सर्जरी से बचा सकते हैं। अथेरेक्टॉमी में प्रयुक्त होने वाले रोटाब्लेशन उपकरण में हीरे के लाखों क्रिस्टलों से युक्त एक बीजकोश(बर्र) रहता है। यह बर्र प्रति मिनट 150,000 से 200,000 बार परिक्रमण करता है और कैल्शियम को ठीक उसी प्रकार काट देता है, जिस प्रकार हीरा शीशे को काटता है। कैल्शियम को एक बार हटा देने के उपरांत, स्टेंटिंग की प्रक्रिया के उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त होते हैं।“

हाल के दिनों में इस रोग की बढ़ती घटनाओं के कारण, भारत में हृदय प्रणाली के रोगों पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है। कुछ जोखिम के कारक, किसी व्यक्ति को अन्य की अपेक्षा कोरोनरी हृदय रोगों तथा दिल के दौरे के अत्यधिक जोखिम की ओर धकेल देते हैं। रोगियों को जोखिम के अनेक महत्वपूर्ण कारणों में से अधिक ब्लड कोलेस्ट्रॉल तथा ट्राइग्लिसराइड के स्तरों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा प्रीडायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक क्रियाकलापों में कमी, अस्वास्थ्यकर भोजन तथा तनाव पर विशेष नजर अवश्य बनाए रखनी चाहिए।

“अपने हृदय की देखभाल करना, उन सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक हो सकता है, जिसे आप अपने स्वास्थ्य तथा तंदरुस्ती के लिए करते हैं। लेकिन, चूंकि हृदय के स्वास्थ्य में बदलती दैनिक आदतें शामिल हैं, इसलिए इसके लिए कुछ वास्तविक प्रयास अपेक्षित हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, एक समय में केवल एक आदत के निदान की कोशिश करें। कोई व्यक्ति हमेशा आदर्श भोजन नहीं खाता है और न ही शारीरिक क्रियाकलापों को समुचित मात्रा में कर पाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप समझदारी से एक यथार्थवादी योजना का पालन करें, जो आपके बढ़ते हृदय रोग के अवसरों को नियमित रूप से कम करेगा,” डॉ. बहादुर कहते हैं।

असामान्य या अत्यधिक ब्लड लिपिड्स(वसा), हृदय प्रणाली के रोग का एक सबसे महत्वपूर्ण कारण है, इसलिए यह काफी आवश्यक है कि संतृप्त वसा का उपभोग न्यूनतम हो। उच्च रक्तचाप जिसे हाइपरटेंशन भी कहा जाता है, “साइलेंट किलर” के रूप में जाना जाता है क्योंकि अधिकांश व्यक्तियों में यह कोई लक्षण नहीं प्रदर्शित करता है। उच्च रक्तचाप के कारण, आपके रक्तवाहिकाओं की नाजुक इनर लाइनिंग को काफी क्षति पहुँचती है। जितना ऊँचा आपका रक्तचाप(बी.पी.) होगा, जोखिम भी उतना ही बड़ा होगा। स्वस्थ रक्तचाप बनाए रखने के लिए, अपने भोजन में नमक की न्यूनतम मात्रा का उपयोग करें। मधुमेह तथा मोटापे पर नियंत्रण भी काफी महत्वपूर्ण है। मधुमेह वाले रोगी को यह जोखिम उतना ही अधिक होता है, जितना जोखिम हृदयाघात झेल चुके मरीज को होता है। धूम्रपान भी, हृदय प्रणाली के रोगों के प्रमुख कारणों में से एक है।

“स्वस्थ भोजन तथा व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना, आपको अपने हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में काफी लाभदायक हो सकता है। इसके अतिरिक्त, रोगियों को अपने स्वास्थ्य की नियमित जाँच करानी चाहिए और हमारे देश में आज हृदय रोगियों के लिए उपलब्ध हृदय की देखभाल की अद्यतन तकनीकों की जानकारी रखनी चाहिए। ईलाज से भयभीत नहीं होना चाहिए तथा रोगियों को उनके हृदय की स्थिति के कारण होने वाले किसी घातक परिणाम से बचने में सहायता प्रदान करने वाले रोग-निदान की माँग अवश्य करनी चाहिए,” डॉ. बहादुर आगे कहते हैं।

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