
लखनऊ : अगर जायज़ा लिया जाए के गरीबो की और उन लोगो की क्या हालत है इस लॉकडाउन में जो या तो रोज़ कमाते थे या फिर कभी कभी, इस बात को पता करने के लिए हमें अपने घरों निकल कर बाहर आना होगा | ये बात 22 मई 2021 की रात 10 बजे की है जब मैं अपने एक मीडिया के काम से घर से निकला था अपने साथी के साथ पर रात में लौटते वक़्त अकेला था तब ही सड़क पर कुछ रिक्शा चालक दिखे, तब ही सोचा कि आज क्यों न रिक्शे से घर जाया जाए, क्योकि लॉकडाउन था तो रिक्शा पूरा करना पड़ा तो वो रिक्शे वाला मान गया | रास्ते में उससे बाते होने लगी, इन्ही बातों में कुछ सवालात मैंने उससे कियेताके पता चले के कैसे इन लोगो का घर चल रहा, सबसे पहले यही पुचा जब इस लॉकडाउन में जब आपको इजाज़त नही इ रिक्शा चलने की तो आप बहार क्यों निकल रहे तो जवाब मिला जो यकीनन आप सब को भावुक कर सकता है|
उसने कहा,अपने और अपने घर वालो के पेट के लिए भला अब बीमारी से कितना डरे या चाललं से डरे’ फिर मैंने पुचा क्या अभी तक पुलि रोका या कार्यवाही की तो उसने कहा, ‘रोकापर चालान नही किया, कभी कभी तो अपनी माँ को लेके जाता हु मज़बूरी में ताके पुलिस रोके न ये सब बाते सुनके बड़ी दुःख महसूस हुआ के दुनिया लोग लॉकडाउन बड़े आराम से गुज़ार रहे पर कुछ ऐसे भी है जिन्हें एक एक दिन गुज़ारने का सोचना पड़ता है | हम भारतवासीसंपूर्ण रूप से लॉकडाउन का समर्थन करते है ताके ये बीमारी जल्द ख़तम हो और सब इसके खतरे से बचे, पर साथ हि इस बात को भी देखना होगा के हमारे आस पास के लोगो के लिए ये वक़्त कठिन न हो जाए |
जय हिन्द