
मुख्यमंत्री, मंत्री..गिरेंगे तो प्यादों का क्या होगा!
लखनऊ: लखनऊ में हाल ही में राजनीति का पारा काफी गरम रहा है। सपा (समाजवादी पार्टी) की नेता और मशहूर शायर मुनव्वर राणा की बेटी सुमैय्या राणा ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उन्हें हाउस अरेस्ट (अपने घर पर नजरबंदी) रखा गया है। ऐसा तब हुआ जब वे मुख्यमंत्री और कुछ मंत्रियों के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं। सुमैय्या का कहना है कि उन्हें पुलिस ने उनके घर के बाहर पहरा लगाया हुआ है और बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और कुछ नेताओं ने महिला विरोधी बयान दिया है और महिलाओं के सम्मान को चोट पहुंचाई है, इसलिए वे विरोध करना चाहती थीं।
सुमैय्या ने कहा है कि अगर मुख्यमंत्री, मंत्री गिरें भी जाएँ, तो “प्यादों का क्या होगा”, यानी छोटे लोगों का क्या होगा — इस तरह के बयान से स्पष्ट होता है कि वे मानती हैं कि बड़े नेताओं के फैसलों का असर आम लोगों और खासकर कमजोर वर्गों पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सड़कों पर लड़ाई जारी रखेंगी और महिलाओं तथा समाज के कमजोर तबकों के हक के लिये आवाज़ उठाएँगी। विरोध का कारण यह भी बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने हाल में हिजाब मामले और महिलाओं के पहनावे तथा सम्मान पर विवादित बयान दिए हैं, जिससे सपा और कुछ सामाजिक संगठन नाराज़ हैं और इसे महिला सम्मान और व्यक्तिगत आज़ादी के खिलाफ मानते हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुमैय्या राणा के हाउस अरेस्ट के आरोपों को अलग तरीके से पेश किया है और कहा है कि उन्हें किसी कानूनी वजह से हिरासत में नहीं रखा गया है; यह विवाद राजनीतिक बयानबाज़ी का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है, जहाँ सपा और इसके समर्थक यह कहते दिख रहे हैं कि सरकार लोगों की आवाज़ दबा रही है, जबकि प्रशासन कहता है कि सब कुछ कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।