
बी.एस.पी. की आल-इंडिया बैठक में मायावती ने दिए संगठन सशक्तिकरण के निर्देश, कहा—‘बहुजन समाज को वोट की ताकत से अपने हक की मास्टर चाबी हासिल करनी होगी’
बी.एस.पी. की आल-इंडिया बैठक में मायावती ने दिए संगठन सशक्तिकरण के निर्देश, कहा—‘बहुजन समाज को वोट की ताकत से अपने हक की मास्टर चाबी हासिल करनी होगी’
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज लखनऊ में पार्टी की आल-इंडिया बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड की 16 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक के बाद आयोजित की गई। इस बैठक में देश के अन्य राज्यों में संगठन की ज़मीनी तैयारियों, जनाधार बढ़ाने के प्रयासों और मिशनरी कार्यों की समीक्षा की गई। मायावती ने संगठन में पाई गई कमियों को दूर करने और नये राजनीतिक हालात के अनुरूप आगे की रणनीति तय करने के निर्देश दिए।बैठक में उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर को लखनऊ स्थित ‘मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल’ पर संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित ऐतिहासिक राज्य स्तरीय कार्यक्रम की सफलता ने उत्तर प्रदेश के गाँव-गाँव तक बहुजन समाज में नया उत्साह और जागरूकता पैदा की है। मायावती ने कहा कि यह ऊर्जा और जोश दूसरे राज्यों के संगठन इकाइयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने, ताकि पार्टी का मिशन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के समतामूलक संविधान की भावना के अनुरूप साकार हो सके।मायावती ने देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, महिला असुरक्षा, जातिवादी व साम्प्रदायिक हिंसा और भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकारें संकीर्ण जातिवादी और राजनीतिक स्वार्थ में लिप्त होकर जनहित और देशहित से विमुख हो रही हैं, जिससे देश का विकास और प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि संविधान की पवित्रता को सर्वोपरि मानने वाले सभी लोगों को इस स्थिति पर सजग रहना होगा।दलितों और अन्य बहुजन वर्गों के लगातार जारी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक शोषण पर उन्होंने कहा कि इससे मुक्ति तभी सम्भव है जब यह समाज वोटों की शक्ति से सत्ता की “मास्टर चाबी” अपने हाथों में लेगा। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अम्बेडकर और मान्यवर कांशीराम का यही संदेश था कि सत्ता ही स्वाभिमान और सम्मान का वास्तविक साधन है।देश के संवैधानिक तंत्र में हाल में घटी जातिवादी घटनाओं—जैसे हरियाणा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आत्महत्या और न्यायपालिका से जुड़ी अप्रिय घटनाओं—पर मायावती ने गंभीर चिंता जताई और कहा कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मामलों में सरकार और संस्थानों की उदासीनता कानून के राज की भावना के विरुद्ध है।बी.एस.पी. प्रमुख ने कहा कि पार्टी किसी पूंजीपति या धन्नासेठ के सहारे चलने वाली पूंजीवादी पार्टी नहीं है, बल्कि यह संविधान के मानवतावादी और जनकल्याणकारी विचारों पर आधारित अंबेडकरवादी पार्टी है। उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. का लक्ष्य सर्वसमाज, विशेषकर दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, मुस्लिमों और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें समान अवसर प्रदान करना है।मायावती ने कार्यकर्ताओं से 15 जनवरी को अपने जन्मदिन पर आर्थिक सहयोग की परम्परा जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि यह सहयोग पार्टी को अपने मिशन—‘लेने वाले से देने वाला समाज’—की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा।बैठक के अंत में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने 9 अक्टूबर के ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के लिए मायावती को बधाई दी और संकल्प लिया कि वे पार्टी के संदेश को गाँव-गाँव तक पहुँचाकर बी.एस.पी. को सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। मायावती ने उनके उत्साह, हिम्मत और समर्पण के लिए सभी का धन्यवाद किया।
