
बिहार : वह अदृश्य शक्ति आपके अच्छे-बुरे कर्मों को पूरा रिकॉर्ड कर रहा है उसी के अनुसार आपको सजा मिलेगीशमशान घाट में शरीर को मुक्ति मिलती है, जीवात्मा को नहीं जीवात्मा को मुक्ति-मोक्ष गुरु महाराज या वो जिसे शक्ति प्रदान करें, वह दिला सकते हैं जनमानस में भगवान के अस्तित्व के प्रति विश्वास दिलाने वाले, जीते जी मुक्ति-मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग नामदान देने वाले उज्जैन के पूज्य संत सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 9 दिसंबर 2021 को गोपालगंज बिहार में नामदान की वर्षा करते हुए बताया कि प्रभु और मौत यही दो सत्य हैं बाकी झूठा सब संसार। यहां की कोई चीज न किसी के काम आई न आयेगी। आज कोई भले ही आंख बचाकर के गलत काम कर ले कि क्या कोई देख रहा है? कहा न-

राम झरोखे बैठकर सबका मुजरा लेय
जाकौ जैसी चाकरी वाकौ वैसा देय
आपको नहीं पता है वह अदृश्य शक्ति जिसको आप देख नहीं पाते हो, आपका सब कुछ देख रहा है। उसके पास पूरा रिकॉर्ड है, उसी के अनुसार आप को सजा दे देगा। मनुष्य शरीर पाने का अर्थ समझो। यह खाने-पीने, मौज-मस्ती के लिए नहीं मिला। इस पर दया करो। दया क्या है?
दया धर्म तन बसै शरीरा
ताकि रक्षा करे रघुवीरा
इसको बचाया नहीं तो नर्कों में बड़ी मार पड़ती है, बहुत तकलीफ होती है। आप अगर नर्कों में पड़ी जीवात्मा की रोने की आवाज को सुनोगे तो सुनकर के ही आपको दु:ख होने लग जाएगा। इतनी करुण आवाज होती है। तो नर्कों से इसको बचाओ। असला काम क्या है? इस जीवात्मा को मुक्ति-मोक्ष दिला दो।
शमशान घाट में मुक्ति धाम लिखा रहता है। वहां शरीर को तो मुक्ति दिला दोगे लेकिन जीवात्मा की मुक्ति नहीं होगी
कहीं लिखा रहता है मुक्ति-धाम मोक्ष-धाम। मुर्दा को तो जलाकर चले आते हो, वहां शरीर की तो मुक्ति हो जाती हैं। धरती में गाड़ देते हैं मनुष्य शरीर को। हड्डी भी मिट्टी में मिल जाती है। यह मिट्टी के एक खिलौना को मिट्टी में मिला करके मुक्ति तो दिला देते हैं लेकिन जीवात्मा को मुक्ति नहीं मिलेगी। मुक्ति कैसे मिलेगी? युक्ति से मुक्ति मिलेगी। युक्ति कौन बताता है? जो समरथ गुरु होते हैं और जहां की जीवात्मा है, सब लोग को वहां पहुंचा देते हैं।
सतपुरुष ही संतो को अपना पावर देकर भेजते हैं जीवों को अपने निज घर लाने के लिये
गुरु महाराज पूरे सतगुरु थे। इन्होंने बहुतों को रास्ता बताया और रास्ते पर चलाया और मंजिल तक भी पहुंचा दिया, मुक्ति दिला दिया। फिर वह दु:ख के संसार में आने वाले नहीं हैं। सब लोग, यह सारी जीवात्मा उतारी गई हैं जितने भी देवी-देवता, अंड-पिंड-ब्रह्मांड के जीव, मृत्युलोक के जीव सब सतलोक वासी हैं। संतों को अपनी पूरी पावर देकर सतपुरुष भेजते हैं, काम करने के लिए। इसीलिए तो कहा गया-
सतपुरुष की आरसी संतन की है देह
लखना चाहो जो अलख को इन्हीं में लख लेह
अगर सतपुरुष, परमात्मा को देखना चाहते हो तो संतो में देखो, वह आपको मिलेगा।गुरु अपने जानशीं को पावर देकर जाते हैं, वक्त के सन्त वहीं मुक्ति-मोक्ष दिला सकते हैं मुक्ति मोक्ष कौन दिला सकता है? गुरु महाराज जैसी शक्तियां दिला सकती हैं या गुरु महाराज जिसको शक्ति प्रदान करके गए वह दिला सकते हैं। मुक्ति-मोक्ष दिलाना ही लक्ष्य है।