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युद्ध के बीच US में हड़कंप – अंदर से विरोध शुरू

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युद्ध के बीच US में हड़कंप – अंदर से विरोध शुरू!

 

 

ईरान-अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर से ही अब विरोध की आवाज़ें उठने लगी हैं। इसी कड़ी में Joe Kent, जो नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर रहे हैं, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत सैन्य कार्रवाई तेज की जा रही है। केंट का यह कदम न सिर्फ प्रशासन के भीतर असंतोष को दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अमेरिकी नीतियों को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।

इस्तीफा देने के बाद जो केंट ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर Donald Trump की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ शुरू की गई यह जंग रणनीतिक रूप से कमजोर है और इसके दीर्घकालिक परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। केंट के अनुसार, इस युद्ध में अमेरिका बिना स्पष्ट लक्ष्य और ठोस योजना के आगे बढ़ रहा है, जिससे न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी बल्कि अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

केंट ने अपने बयान में यह भी कहा कि इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है। उन्होंने दावा किया कि कई अहम फैसले बिना पूरी खुफिया जानकारी के लिए गए हैं, जो भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध मिडिल ईस्ट को एक और लंबे और विनाशकारी संघर्ष की ओर धकेल सकता है, जैसा कि पहले इराक और अफगानिस्तान में देखा गया था।

उन्होंने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को लेकर भी कई चौंकाने वाले खुलासे किए। केंट के मुताबिक, इस ऑपरेशन के तहत किए जा रहे हमलों में पारदर्शिता की कमी है और कई बार नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो केंट का इस्तीफा सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी प्रशासन के भीतर गहराते मतभेदों का संकेत है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तरह के इस्तीफे आगे भी होते हैं, तो यह सरकार की स्थिरता और उसकी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

वहीं दूसरी ओर, व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। कुछ अधिकारियों ने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रशासन के भीतर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है। कई देशों ने अपील की है कि अमेरिका और इज़राइल संयम बरतें और कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता दें। संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, जहां कई सदस्य देशों ने युद्ध को तुरंत रोकने की मांग की है।

कुल मिलाकर, जो केंट का इस्तीफा इस पूरे संघर्ष के बीच एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यह न सिर्फ अमेरिका की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन इस संकट को कैसे संभालता है और क्या कूटनीतिक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

 

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