diwali horizontal

दक्षिण और पश्चिम भारत के सात राज्यों के पार्टी संगठन की समीक्षा बैठक में मायावती ने जातीय-भाषाई उन्माद और बढ़ती दुर्घटनाओं पर जताई चिंता, देशहित में सरकारों को चेताया

0 236

दक्षिण और पश्चिम भारत के सात राज्यों के पार्टी संगठन की समीक्षा बैठक में मायावती ने जातीय-भाषाई उन्माद और बढ़ती दुर्घटनाओं पर जताई चिंता, देशहित में सरकारों को चेताया

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं और पूर्व सांसद (लोकसभा व राज्यसभा) मायावती ने आज लखनऊ में पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल राज्यों के पार्टी संगठन की तैयारियों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने न केवल संगठन की मजबूती पर फोकस किया, बल्कि देश में भाषा, जाति और धर्म के नाम पर फैल रहे उन्माद तथा जनहित के मुद्दों की अनदेखी पर गहरी चिंता भी जताई।बैठक में सातों राज्यों के पार्टी समन्वयकों, प्रभारियों एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट पेश की। मायावती ने संगठन में हो रही प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि पार्टी का अम्बेडकरवादी, मानवतावादी और बहुजन हितैषी चरित्र हर हाल में बरकरार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी का मिशन बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के आत्म-सम्मान और संविधान प्रदत्त अधिकारों के संरक्षण के साथ जुड़ा है, जिसे कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।मायावती ने कहा कि हाल के दिनों में महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित देश के कई राज्यों में भाषाई विवाद और जातीय हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने कहा, “जब धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा की संकीर्ण राजनीति देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम पर भारी पड़ने लगती है, तब ऐसे हालात पैदा होते हैं।” उन्होंने विशेष रूप से मुंबई जैसे बहुसांस्कृतिक शहरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि देश की आर्थिक राजधानी में सभी राज्यों के लोग रहते हैं, अतः उनकी जान-माल और मज़हब की सुरक्षा की गारंटी सरकार को सुनिश्चित करनी चाहिए।बैठक में देश के अवसंरचना परियोजनाओं में बढ़ती दुर्घटनाओं पर भी मायावती ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पुल, एक्सप्रेसवे और सड़क निर्माण के दौरान हो रही दुर्घटनाएं सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं, जिससे जनता का भरोसा डगमगाता है और जवाबदेही का संकट पैदा होता है।कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर लगातार जारी राजनीतिक टकराव और गुटबाजी पर भी उन्होंने चिंता जताई। मायावती ने कहा कि यह राजनीतिक अस्थिरता कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर रही है और इसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब, दलित, पिछड़े और मजलूम तबके को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और जातिगत उन्माद वहां भी लोगों के जीवन को त्रस्त कर रहा है।तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की सरकारों पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की जो स्थिति इन राज्यों में दिखनी चाहिए, वह कहीं भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि बीएसपी शासनकाल में उत्तर प्रदेश में जो सामाजिक न्याय और सर्वजन कल्याण का मॉडल देखा गया था, उसे अब देश के अन्य राज्यों में भी दोहराने की ज़रूरत है।मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे संगठन को मज़बूत करने के साथ-साथ जनता की सेवा और सहायता के कार्यों में भी पीछे न रहें। उन्होंने कहा, “हर मुश्किल समय में बहुजन समाज को मज़लूम ही मज़लूम का मददगार बनकर सामने आना चाहिए। घड़ियाली आंसू बहाने वाले तो बहुत मिल जाएंगे, लेकिन ज़मीन पर साथ देने वाला दुर्लभ होता है।”बैठक के अंत में मायावती ने सभी राज्यों से आए प्रतिनिधियों से लखनऊ स्थित बीएसपी सरकार द्वारा निर्मित सामाजिक स्मारकों और स्थलों को देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये स्थल न केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि बहुजन समाज की आत्म-गरिमा, सम्मान और जागरूकता के प्रतीक भी हैं। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज, डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम जी जैसे महापुरुषों को समर्पित इन स्थलों को बहुजन तीर्थ करार दिया।इस बैठक से साफ संकेत है कि बीएसपी अब दक्षिण और पश्चिम भारत में भी अपने जनाधार के विस्तार और संगठनात्मक मजबूती की ओर गंभीरता से कार्य कर रही है। साथ ही पार्टी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि जनहित, सामाजिक न्याय और संविधान मूल्यों से कोई समझौता न हो।

Leave A Reply

Your email address will not be published.