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लखनऊ में अंतरराज्यीय आयुष समन्वय बैठक संपन्न, उत्तर प्रदेश को आयुष चिकित्सा का हब बनाने की दिशा में हुए महत्वपूर्ण निर्णय

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लखनऊ में अंतरराज्यीय आयुष समन्वय बैठक संपन्न, उत्तर प्रदेश को आयुष चिकित्सा का हब बनाने की दिशा में हुए महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्यमंत्री ने गुरुवार को लखनऊ स्थित राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, टुड़ियागंज के सभागार में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत अंतरराज्यीय समन्वय बैठक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह बैठक न केवल राज्यों के बीच आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में अनुभव और नीतियों के आदान-प्रदान का अवसर है, बल्कि भविष्य में आयुष चिकित्सा को एक सशक्त और सर्वसुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम पहल भी है।राज्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में आयुष चिकित्सालयों को उन्नत बनाने, औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले समय में 50 बिस्तरों वाले और नए आयुष अस्पतालों की स्थापना की जाएगी, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग समान रूप से लाभान्वित होंगे।आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने बैठक में बताया कि केंद्र सरकार से बजट में वृद्धि का अनुरोध किया गया है ताकि अधोसंरचना और सेवा गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि इस बैठक में आयुष सेवाओं में आईपीएचएस मानकों, अधोसंरचना विकास, गुणवत्ता मानकों, स्वास्थ्य सेवा विवरण और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में आयुष सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति हुई है।राष्ट्रीय आयुष मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक निशा अनंत ने प्रदेश में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना में आ रही बाधाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुफ्त जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने अपील की कि यदि लोग स्वेच्छा से जमीन दान करें तो प्रदेश में आयुष सेवाओं का और विस्तार संभव हो सकेगा।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की ओर से आए जॉइंट एडवाइजर डॉ. सुरेश कुमार ने भरोसा दिलाया कि आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार और शोध कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से पूरा सहयोग और बजट प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शोध के साथ-साथ उसका लाभ आमजन तक कैसे पहुंचे, इस पर भी प्राथमिकता से काम हो रहा है।बैठक में हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की चुनौतियों और उपलब्धियों को साझा किया। सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने भविष्य के लिए साझा दिशा तय करने के उद्देश्य से कई रचनात्मक सुझाव भी दिए। बैठक में आईपीएचएस एवं एनएबीएच मानकों के अनुसार स्वास्थ्य इकाइयों के सशक्तीकरण, डिजिटल स्वास्थ्य सूचना प्रणाली के सार्वभौमिक अनुप्रयोग, गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और स्टाफ प्रशिक्षण पर विशेष बल देने की जरूरत को रेखांकित किया गया।महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. दिनेश कुमार मौर्य ने मांग रखी कि संस्थान में नए विषयों में एम.डी. पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं और औषधियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बजट में वृद्धि की जाए।यह बैठक आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि देशभर के लिए एक दिशा निर्धारक साबित हुई है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, वैज्ञानिक और समावेशी बनाने के लिए बहुआयामी रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।

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