
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ हर्मुज़ बंद किया / सैन्य अभ्यास किए!
IRAN vs US CONFLICTS:ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामनेई ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कड़ी चेतावनी दी है। खामनेई ने कहा, “ईरान पर कब्ज़ा का सपना देखते रहो।” उनका यह बयान अमेरिकी प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सीधे संदेश के रूप में माना जा रहा है। खामनेई ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश द्वारा ईरान पर हमला करने की कोशिश को वे गंभीरता से लेंगे और उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।

उनका यह भी कहना था कि ईरान की रक्षा के लिए उनकी सेना और मिसाइल प्रणाली पूरी तरह तैयार है और कोई भी खतरा ईरान को डिगा नहीं सकता।
इस बीच ईरान ने हॉरमूज़ की जलडमरूमध्य में लाइव-फायर मिसाइल अभ्यास किया। यह अभ्यास न केवल ईरान की सैन्य ताकत दिखाने का तरीका था बल्कि अमेरिका और अन्य देशों को चेतावनी देने का भी संदेश था। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य अभ्यास या तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। मिसाइल लॉन्च और सैन्य परेड के जरिए ईरान ने यह दिखाया कि वह अपने क्षेत्र और देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका ने भी इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी नौसैनिक बलों को सतर्क कर दिया गया है और मध्य पूर्व में उनकी मौजूदगी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह सीधे युद्ध की स्थिति नहीं है, बल्कि दोनों देश अपनी ताकत दिखा रहे हैं और एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ही अपने-अपने रणनीतिक और सैन्य कदम उठा रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना से पहले तैयार रहे।

इसी बीच कूटनीति का रास्ता भी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ओमान के माध्यम से दोनों देशों के बीच परोक्ष परमाणु वार्ता जारी है। वार्ता का उद्देश्य तनाव को कम करना और बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंचना है। हालांकि, खामनेई के कड़े बयान और मिसाइल ड्रिल के बाद यह स्पष्ट है कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव को सहन नहीं करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल यह एक रणनीतिक संदेश है कि अमेरिका को सीधे कार्रवाई करने से पहले स्थिति के गंभीर परिणामों को समझना होगा।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ईरान की ओर से मिसाइल और सैन्य ताकत का प्रदर्शन अमेरिका को चेतावनी देने के साथ-साथ उसके अंदर से किसी भी उकसावे को रोकने का प्रयास भी है। दूसरी ओर, अमेरिका अपने नौसैनिक बलों और कूटनीति के माध्यम से ईरान पर नजर रख रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव से न केवल क्षेत्रीय राजनीति प्रभावित हो रही है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल सीधी जंग नहीं हुई है, लेकिन तनाव का स्तर बहुत ऊँचा है। दोनों देशों की सेना, मिसाइल और रणनीतिक तैयारी लगातार जारी है। किसी भी छोटी गलती या गलतफहमी से स्थिति बिगड़ सकती है और इससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की संभावना बन सकती है। आम जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह स्थिति चिंताजनक है।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल दोनों देश अपनी ताकत और प्रभाव दिखा रहे हैं। कूटनीति और बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ रहे। यह स्थिति दुनिया को याद दिलाती है कि युद्ध हमेशा अचानक शुरू हो सकता है, इसलिए दोनों देशों के लिए संयम और समझदारी से काम करना आवश्यक है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान और अमेरिका किस तरह अपने कूटनीतिक और सैन्य कदमों के जरिए तनाव को कम करने या बढ़ाने का निर्णय लेते हैं।