
बीजेपी पर चुनाव में जीत पाने की चाल?
अखिलेश यादव ने सुझाव दिया है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीतने में असमर्थ होने की वजह से मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ कर रही है और उनके विरोधियों के वोटरों के नाम कटवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि विशेष स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया का दुरुपयोग करके, फॉर्म 7 के जरिए सुनियोजित तरीके से विपक्षी समर्थकों और PDA समुदाय (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। किसानों, मजदूरों और कई समूहों का कहना है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ेगा और मतदान अधिकार कमज़ोर होगा।
अखिलेश यादव का यह भी कहना है कि इन हटाए गए नामों को ज्यादातर उन क्षेत्रों से निकाला जा रहा है, जहां पिछले चुनावों में भाजपा को हार मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकतर फॉर्म 7 “अजनबी व्यक्तियों” द्वारा दायर किए गए हैं, जिससे यह लगता है कि यह एक सुनियोजित कोशिश है, न कि आम जनता की गलती।
सपा प्रमुख ने यह आरोप चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत का संकेत देते हुए लगाया है, और सरकार तथा चुनाव प्रशासन को खरी-खोटी सुना दी है। उनका कहना है कि अगर मतदाता सूची से वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और राज्यों का चुनाव निष्पक्ष नहीं रह पाएगा।

इस पर भाजपा का पक्ष अलग है। भाजपा और उसके समर्थकों का कहना है कि SIR प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को साफ़ और अपडेट रखना है, और किसी के वोटर आईडी को हटा देना साजिश नहीं बल्कि तकनीकी कारणों से हो सकता है। उन्होंने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा है कि विपक्ष अपना ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए बड़ा सवाल बना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह मामला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़ा हुआ है, और SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी बहस तेज़ हो गई है क्योंकि विपक्ष इसे मतदाता अधिकारों पर हमला बता रहा है। वहीं सरकार इसका जवाब प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए दे रही है।

फिलहाल मामला तूल पकड़ रहा है, और आगे आने वाले दिनों में इस विषय पर और प्रतिक्रियाएँ, कोर्ट के कदम और चुनावी तैयारियाँ देखने को मिल सकती हैं।