
जेसीपी ने कहा जनता मे सुरक्षा की भावना को जागृत करने के लिए किया गया रूटमार्च
लखनऊ : कोरोना काल मे पड़ रहे चुहेल्लुम को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने कमर कस ली है। सरकारी गाईड लाईन के अनुसार चेहल्लुम को सुरक्षित माहौल मे शान्तीपूर्ण तरीके से सकुशल सम्पन्न कराने के लिए चेहल्लुम से मात्र दो दिन पहले आज पुराने लखनऊ मे संयुक्त पुलिस कमिश्नर नवीन अरोड़ा के नेतृत्व मे रूट मार्च कर जनता मे सुरक्षा की भवना को जागृत किया गया। चेहल्लुम से पूर्व जेसीपी के नेतृत्व मे किया गया रूट मार्च आज दोपहर रूमीगेट पुलिस चाौकी के पास से शुरू किया गया जो चाौक पाटानाला, नख्खास बिल्लौचपुरा ,मंसूरनगर कटरा काज़मैन होता हुआ पुराने लखनऊ की तंग गलियों से गुज़रा

कड़ी धूम मे पुलिस फोर्स के साथ पैदल चल रहे जेसीपी नवीन अरोड़ा डीसीपी पश्चिम देवेश पाडेण्य एडीसीपी, पश्चिम, एसीपी चाौक, एसीपी बाज़ार खाला , एसीपी कैसरबाग के अलावा पश्चिम क्षेत्र के सभी थानो के इन्स्पेक्टरो के अलावा भारी सख्या मे पुलिस फोर्स सड़क पर चलने वाले लोगो के कोरोना वायरस से बचाव के लिए जागरूक भी करते हुए देखे गए । सड़क पर जो लोग लापरवाही वश बिना मास्क के नज़र आ रहे थे पुलिस के अधिकारी उन लोगो से कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिग का पालन करने के लिए उन्हे जागरूक भी कर रहे थे। जेसीपी नवीन अरोड़ का कहना था कि रूट मार्च का मकसद जनता मे सुरक्षा की भावना को जागृत करना है उन्हाने कहा कि लोग कानून को अपने हाथ मे कतई न ले उन्होने कहा कि हम जनता की सुरक्षा के लिए दृढ संकल्प है उन्होने चेहल्लुम के मौके पर लोगो से सरकारी गाईड लाईन और कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमो का अक्षरश
पालन करने की अपील भी की। आपको बता दे कि 25 मार्च से लागू हुए लाक डाउन के बाद पूरे देश मे सभी धर्मो के धार्मिक कार्यक्रमो पर लगी रोक की वजह से सभी धर्मो के धार्मिक कार्यक्रम प्रभावित हुए है कोरोना वायरस की कोई दवा न होने की वजह से इस घातक बिमारी की रोकथाम के लिए एक मात्र उपाए सोशल डिस्टेंंसग ही माना गया है और किसी भी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन बिना भीड़ के मुमकिन नही होता है इस लिए सभी धर्मो के भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमो पर अभी भी रोक लगी हुई है

कोरोना वायरस की वजह से इस साल शिया समुदाय का एक भी जुलूस नही निकल पाया 19 रमज़ान 21 रमज़ान के जुलूसो के अलावा मोहर्रम के महीने मे भी कोई जुलूस नी निकाला गया । मोहर्रम के महीने मे चुनिन्दा इमाम बाड़ो मे पाॅच लोगो के साथ बिना लाड स्पीकर के मजलिसे पढ़े जाने की अनुमति दी गई थी थी । हज़रत इमाम हुसैन अ0स0 की शहादत के मौके पर दस मोहर्रम को भी न तो यौमे आशूर का जुलूस ही निकाला गया और न ही कर्बलाओ मे ताज़िए दफ्न करने की ही अनुमति दी गई थी । लोगो को उम्मीद थी कि मोहर्रम तो जैसे तैसे गुज़र गया लेकिन हज़रत इमाम हुसैन के चेहल्लुम के मौके पर शिया समुदाय के लोगो को जुलूस निकाल कर इमाम हुसैन का ग़म मनाने का मौका ज़रूर मिलेगा लेकिन कोरोना वायरस का प्रकोप है कि कम होने का नाम नही ले रहा
है जिसकी वजह से फिलहाल किसी भी तरह के जुलूस को निकालने पर पाबन्दी ही है। 25 मार्च से लागू हुए लाक डाउन के बाद सभी धर्मो खास कर शिया समुदाय के लोगो ने भी संजीदगी से काम लेते हुए इस तरह का कोई भी कार्यक्रम आयोजित नही किया जिससे सोशल डिस्टें सग बिगड़े और कोरोना के संक्रमण का खतरा बढने़ खतरा हो । यही जताई जा रही है कि साल 2020 मे किसी भी धर्म का कोई भी कार्यक्रम कोरोना वायरस के कारण पहले की तरह से आयोजित नही हो पाएगा ।