diwali horizontal

Khurshid का बड़ा बयान! Peace Talk या पॉलिटिकल गेम?

0 26

आज की बड़ी खबर जुड़ी है उस कूटनीतिक हलचल से, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। Pakistan की राजधानी Islamabad अचानक ग्लोबल पॉलिटिक्स का सेंटर बन गई है, जहां Iran और United States के बीच हाई-लेवल शांति वार्ता हो रही है। लेकिन इसी बीच एक बड़ा बयान सामने आया है वरिष्ठ कांग्रेस नेता Salman Khurshid का, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका और पाकिस्तान की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

सबसे पहले समझते हैं पूरा मामला। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, Strait of Hormuz पर संकट और लगातार बढ़ती हिंसा के बीच यह बातचीत शुरू हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अमेरिका और ईरान के बीच 1979 के बाद सबसे बड़ी सीधी बातचीत मानी जा रही है। यही वजह है कि पूरी दुनिया इस पर नजर बनाए हुए है।

अब बात करते हैं पाकिस्तान की भूमिका की। अंतरराष्ट्रीय मैगज़ीन The Spectator ने पाकिस्तान को इस पूरी प्रक्रिया में एक तरह से “Spectator” यानी दर्शक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान भले ही इस बातचीत की मेजबानी कर रहा हो, लेकिन असल फैसले और रणनीति अभी भी बड़े देशों के हाथ में ही हैं। हालांकि, यह भी सच है कि पाकिस्तान ने बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए अमेरिका और ईरान को एक टेबल पर लाने में अहम भूमिका निभाई है।

इसी मुद्दे पर जब भारत के वरिष्ठ नेता Salman Khurshid से सवाल किया गया, तो उनका रुख काफी संतुलित और स्पष्ट नजर आया। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अक्सर कई देश “मैसेज कैरियर” या “फैसिलिटेटर” की भूमिका निभाते हैं, लेकिन असली बातचीत हमेशा संबंधित देशों के बीच ही होती है। उनके पुराने बयानों से भी यह साफ होता है कि भारत हमेशा द्विपक्षीय बातचीत को प्राथमिकता देता है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को ज्यादा महत्व नहीं देता।

यानी साफ शब्दों में समझें तो भारत इस पूरे घटनाक्रम को दूरी बनाकर देख रहा है। भारत न तो सीधे इस बातचीत का हिस्सा है और न ही किसी तरह की मध्यस्थता कर रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के लिए यह मामला अहम नहीं है। क्योंकि अगर Strait of Hormuz में कोई भी संकट आता है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ेगा।

अब सवाल उठता है—क्या पाकिस्तान वाकई सिर्फ “Spectator” है? या फिर वह खुद को एक बड़े ग्लोबल खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है? रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में अमेरिका, मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं, ताकि वह खुद को एक प्रभावी मध्यस्थ के रूप में पेश कर सके।

वहीं दूसरी तरफ, इस बातचीत को लेकर कई चुनौतियां भी सामने हैं। ईरान ने साफ कहा है कि वह बातचीत तभी आगे बढ़ाएगा जब कुछ शर्तें पूरी हों—जैसे प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय संघर्षों पर रोक। वहीं अमेरिका ने भी कड़ा रुख अपनाया हुआ है और साफ संकेत दिए हैं कि अगर बातचीत असफल होती है, तो सैन्य विकल्प भी खुला है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प बात यह भी है कि पाकिस्तान की मेजबानी के बावजूद, कई विश्लेषक मानते हैं कि यह बातचीत अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और अलग-अलग शर्तें इस प्रक्रिया को जटिल बना रही हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.