
इंदौर : महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण बेकाबू है। लंबे लॉकडाउन की सुगबुगाहट के बीच प्रवासी श्रमिकों का मध्यप्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश और बिहार लौटना जारी है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बीच बसों की आवाजाही पर रोक है। ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह नहीं है इसलिए प्रवासी श्रमिकों द्वारा महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश और फिर आगे का सफर तय किया जा रहा है। महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश में छोटे वाहनों से प्रवासी श्रमिकों का आना जारी है। सबके चेहरे पर एक ही जिद दिखती है कि घर जाना ही है तो ऑटो से भी परेशानी नहीं। मध्यप्रदेश से लगती महाराष्ट्र और गुजरात सीमा पर ऐसे ही नजारे दिख रहे हैं। इनमें परेशानी भी है दर्द भी और घर लौटने के लिए अनूठी जिजीविषा भी।
महाराष्ट्र से लगती मध्यप्रदेश की सीमा पर है बड़वानी जिले का सेंधवा। गत दिवस सुबह दस से 12 बजे के बीच मुंबई-आगरा राजमार्ग पर लोडिंग वाहनों से भरे दिखाई दिए प्रवासी श्रमिक। भूखे प्यासे, तकलीफ से बदहाल प्रवासी श्रमिकों की यात्रा के ये दृश्य पांच दिनों से दिखाई दे रहे हैं। मजबूरी का फायदा उठाकर जीप वाले श्रमिकों की जानवरों की तरह भरकर ला रहे हैं। मध्यप्रदेश में बस वाले भी दोगुना किराया वसूल रहे हैं। श्रमिकों ने कहा कि जब जानवरों की तरह भरे श्रमिकों से भारी जीप और लोडिंग वाहनों को छूट है तो यात्री बसों को क्यों छूट नहीं दे रहे हैं? ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी नागेंद्र पुत्र राजकुमार ने बताया कि पुणे में हम्माली का काम करते थे। काम बंद हो गया इसलिए घर जा रहे हैं। मिर्जापुर निवासी सिद्धनाथ पुणे में काम बंद होने के बाद लौट रहे हैं। आटो से उप्र के उन्नाव जाते राजेश वर्मा और धर्मेन्द्र वर्मा ने बताया कि 15 दिन के प्रयास के बाद भी ट्रेन का टिकट नहीं मिला तो ऑटो से ही मुंबई से उन्नाव स्थित घर के लिए निकल पड़े।