
सोनिया गांधी की रायबरेली में सपा के साथ कांग्रेस का दबदबा

लखनऊ: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में सपा और कांग्रेस का दबदबा कायम है। अब तक आए परिणामों में जहां पूर्व सांसद अशोक सिंह के बेटे मनीष सिंह की पत्नी आरती सिंह ने अमावां द्वितीय से जीत हासिल की है, वहीं जगतपुर से कांग्रेस के राकेश सिंह राना ने अपना जलवा दिखाया है। राही ब्लाक की तीनों सीटों पर जहां सपा समर्थित प्रत्याशी ने जीत हासिल की है वहीं महाराजगंज प्रथम से पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं सपा के पूर्व विधायक रामलाल अकेला के बेटे विक्रांत अकेला ने जीत हासिल की है। उन्होंने सपा से बागी प्रत्याशी को ही नहीं, बल्कि भाजपा के पूर्व विधायक राजाराम त्यागी को धूल चटाई है।
यही नहीं हरचंदपुर तृतीय से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की अनुज बधू सुमन सिंह चुनाव हार गई हैं। सुमन सिंह को सपा की शिवदेवी ने हराया है। भाजपा और बसपा के उम्मीदवार पिछड़े हुए हैं। हरचंदपुर प्रथम से जहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी चुनाव हार गया है वहीं राघवेंद्र प्रताप सिंह निर्दलीय लड़कर चुनाव जीत गए हैं।यह अलग बात है कि राघवेंद्र सिंह एक वरिष्ठ भाजपा नेता के बेटे हैं। यही स्थिति कई और सीटों पर भी है। शाम तक तस्वीर साफ हो पाएगी कि आखिर जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए कौन मजबूत होकर उभरेगा।
सरकार या विपक्ष दोनों में ही होम आइसोलेशन में रहे अखिलेश यादव

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव जब सूबे के मुख्यमंत्री थे, तब भी होम आइसोलेशन में थे और आज विपक्ष में भी होम आइसोलेशन में ही हैं। उनको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोरोना के खिलाफ युद्ध स्तर पर जारी जंग दिखाई नहीं दे रही है। प्रदेश में आज एल-2 व एल-3 ग्रेड के बेडों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है। साथ ही 35 हजार नए बेड और बढ़ाया जा रहे हैं। प्रदेश में होम आइसोलेशन मरीजों को मेडिकल किट का वितरण किया जा रहा है, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर उनसे लगातार संपर्क बनाए है। विपक्ष में बैठी सपा व उनके मुखिया को यह नजर नहीं आएगा। कोरोना संक्रमण में सरकार का सहयोग करने के बजाए अखिलेश अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हुए हैं।
सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव जमीनी हकीकत से हमेशा काफी दूर रहे हैं। जमीन पर आएंगे तो उनको नजर आएगा कि योगी सरकार कोरोना पर किस तरह विजय हासिल करने में जुटी है। उनकी सरकार में स्टेट प्लेन की सुविधा दंगाईयों को दी जाती है थी जबकि योगी सरकार में स्टेट प्लेन जनता की जिदंगी बचाने वाली दवाईयां लाने में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के जनता के हित में किए जा रहे कार्य अखिलेश यादव से गवारा नहीं हो रहे है। प्रदेश द्वारा 2.41 लाख से अधिक होम आइसोलेशन में संक्रमित लोगों को मेडिकल किट पहुंचाने का काम किया गया है। सरकार जनता तक निष्पक्ष रूप से रोजाना कितने मरीज संक्रमित हुए और कितने ठीक होकर अपने घर गए, इसके आंकड़े जारी कर रही है। यह सब सपा मुखिया को तब दिखाई देगा जब वह अपना चश्मा उतार कर होम आइसोलेशन से बाहर आएंगे।
सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि होम आइसोलेशन मरीजों तक मेडिकल किट हो या फिर किसानों के हित की बात , इन सब पर अखिलेश यादव को गुस्सा आता है। अखिलेश यादव ने कभी किसानों का कोई हित नहीं किया है जबकि योगी सरकार में किसानों के हितों पर लगातार काम किया जा रहा है। इसमें चाहे गन्ना किसानों का भुगतान हो या फिर गेहूं क्रय सारे काम सरकार ने समय पर किए। प्रदेश सरकार 1.23 लाख गन्ना किसानों को भुगतान कर चुकी है। गेहूं का क्रय पिछले साल से दोगुना करीब 12 लाख टन क्रय किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव न जाने आंखों पर कौन सा चश्मा लगाए हैं, जो उनको यह नजर नहीं आ रहा है।
कोरोना पीड़ित गरीबों के इलाज का खर्च उठाए केंद्र व वैक्सीन भी मुफ्त दे : मायावती

लखनऊ : बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को ट्वीट कर मांग की है कि केंद्र सरकार देश के गरीब कोरोना पीड़ितों के इलाज का खर्च उठाए और उन्हें मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध करवाए। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि देश में भीषण व दर्दनाक रूप धारण करते कोरोना के प्रकोप के कारण सभी पार्टियों को, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, केन्द्र सरकार से यह माँग करनी चाहिए कि कोरोना-पीड़ित गरीबों व कमजोर वर्गों के इलाज का पूरा खर्च केन्द्र सरकार स्वयं वहन करे और इनको कोरोना वैक्सीन भी मुफ्त में ही लगाए। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र की सरकार इस अनुरोध को स्वीकार नहीं करती है तो फिर सभी राज्य सरकारों को अपने ग़ैरजरूरी खर्चों में कटौती की पहल करके इस जिम्मेदारी को खुद उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी दल मिलकर व आगे आकर पहल करते हैं तो बसपा इसका स्वागत करेगी और इसमें हर संभव अपना पूरा सहयोग करेगी। यही समय की जरूरत भी है।
पंचायत चुनाव: नतीजों से भाजपा तय करेगी 2022 का रोडमैप

लखनऊ : पंचायत चुनाव के नतीजे सिर्फ ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का ही भविष्य नहीं तय करेंगे, बल्कि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का रोडमैप भी तय करेंगे। चुनाव नतीजे भाजपा विधायकों और सांसदों की किस्मत के फैसले की भी पृष्ठभूमि तैयार करेंगे। पंचायत चुनाव से भाजपा को न सिर्फ जमीनी पकड़ का अंदाज मिलेगा, बल्कि सांगठनिक कमजोरियों का भी संकेत मिल जाएगा। निश्चित रूप से पार्टी के रणनीतिकार इन नतीजों के परिप्रेक्ष्य में 2022 की चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे।
इन नतीजों से न सिर्फ चुनावी जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारे गए पदाधिकारियों की क्षमता और कुशलता का आकलन होगा, बल्कि भाजपा नेतृत्व परिणामों के विश्लेषण से यह जानने और समझने का प्रयास भी करेगा कि सांगठनिक पेचों को कहां पर कितना कसने या ढीला करने की जरूरत है।
भाजपा आधिकारिक रूप से पंचायत चुनाव में सिर्फ जिला पंचायत का ही चुनाव लड़ रही है। औसतन चार से छह जिला पंचायत सदस्यों को मिलाकर विधानसभा के एक क्षेत्र हो जाता है।
ऐसे में जिला पंचायत सदस्यों को मिलने वाले वोट को आधार बनाकर भाजपा यह जानने की कोशिश करेगी कि 2017 और 2019 की तुलना में कितने मतों में बढ़ोतरी या कमी आई है। जिसके आधार पर वोटों की गणित दुरुस्ती के अभियान का काम शुरू होगा।
इसके लिए कमजोर इलाकों में न सिर्फ नए और प्रभावी लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, बल्कि वर्तमान सेक्टर तथा बूथ कमेटियों के पुनर्गठन का काम भी शुरू किया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि जिला पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी हर जिले के नतीजों पर मंथन करेगी। क्षेत्रवार, जातिवार नतीजों पर मंथन के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा ने प्रदेश में दो तिहाई बहुमत की सरकार और एक लाख 55 हजार बूथों पर संगठन की शक्ति के बूते सभी 75 जिला पंचायतों में कमल खिलाने की योजना बनाई है।
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव नतीजे आने के बाद क्षेत्रीय एवं जातीय संतुलन बनाते हुए संगठन के ही व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर बैठाने की पार्टी योजना है। ये अध्यक्ष एक तरह से भाजपा के 2022 की चुनावी तैयारियों की महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। कारण, भाजपा ने इन अध्यक्षों के जरिए गांवों के जमीनी विकास की योजना को अमली जामा पहनाकर काम करने वाली सरकार का संदेश देने की तैयारी की है ताकि विधानसभा चुनाव में उसका लाभ मिल सके।
जिला पंचायत चुनाव में सपा, भाजपा और निर्दलीयों के बीच कांटे की टक्कर

बाराबंकी : में जिला पंचायत सदस्यों के अब तक घोषित रुझानों में सपा, भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। पूर्व सपा सांसद और पूर्व भाजपा विधायक अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों से आगे चल रहे हैं। इसके अलावा कई सीटों पर निर्दलीयों और पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। मतगणना धीरे चलने की वजह से देर रात तक किसी भी सीट का परिणाम घोषित नहीं किया जा सका था।
जिला पंचायत सदस्य की 57 सीटों के लिए रविवार को शुरू हुई मतगणना धीमी गति से होने की वजह से देर रात तक किसी भी सीट का परिणाम घोषित नहीं किया जा सका था। लेकिन जो रुझान मिले उससे सपा, भाजपा और निर्दलीयों के बीच सीधे टक्कर देखने को मिली। निंदूरा प्रथम से सपा समर्थित अशफाक आगे चले रहे थे। वहीं द्वितीय से मंजू आगे चल रही थी तृतीय से सपा समर्थित मोहसिन आगे चल रहे थे वहीं चतुर्थ से भाजपा समर्थित पूर्व विधायक राजरानी रावत तथा पंचम से निर्दलीय राजेश रावत अपने निकट प्रतिद्वंद्वियों से आगे चल रहे थे।
इसी प्रकार हैदरगढ़ प्रथम से निर्दलीय कलावती, द्वितीय से भाजपा समर्थित नीतू सिंह, तृतीय से सपा समर्थित रचना और चतुर्थ से आरती आगे चल रही थीं। सिद्धौर प्रथम से भाकियू के रामबरन, द्वितीय से हौसिला प्रसाद, तृतीय से निर्दल सोनी यादव, चतुर्थ से सपा समर्थित पूर्व सांसद रामसागर रावत और पंचम से निर्दल जंग बहादुर आगे चले रहे थे। इसी प्रकार फतेहपुर प्रथम से भाकियू के अवधेश पटेल, द्वितीय से सपा समर्थित संजय यादव, चतुर्थ से निर्दल पूजा सिंह, पंचायत से भाजपा की गीता देवी आगे चल रही थीं।
दरियाबाद प्रथम से निर्दल देवनरायन, द्वितीय से भाजपा के संजय रावत, तृतीय से सपा समर्थित शैल रावत, मसौली प्रथम से बसपा समर्थित डॉ. उमाशरण, द्वितीय से निर्दल सोनिया, तृतीय से भाजपा के भुल्लन, त्रिवेदीगंज प्रथम से निर्दल मिथलेश, द्वितीय से निर्दल रीना और तृतीय से निर्दल नेहा अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों से आगे चल रहे थे। इसी प्रकार रामनगर प्रथम से भाजपा समर्थित राम सिंह, द्वितीय से निर्दल मिथलेश आगे चल रही थीं।
दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने के आरोप में अब तक 87 लोगों को गिरफ्तार

लखनऊ : कोरोना काल में जीवन रक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने के आरोप में अब तक 87 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, इसमें सबसे अधिक 36 गिरफ्तारी लखनऊ से हुई हैं। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रदेश में चलाए गए अभियान के दौरान 11 दिनों में 34 मामले सामने आए। इसमें कोरोना से इलाज में कारगर इंजेक्शन, ऑक्सीजन और दवाइयों की कालाबाजारी में 87 लोगों गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 49 लाख 16 हजार रुपये से अधिक बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो सबसे बड़ी कार्रवाई कानपुर नगर में हुई, जहां मिलेट्री इंटेलीजेंस से मिले इनपुट के बाद रेमडेसिवर के 2इंजेक्शन बरामद किए। लखनऊ में पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के नेतृत्व में बंथरा, गोमतीनगर, गुडंबा और ठाकुर गंज में कार्रवाई की। कालाबाजारी में कई डॉक्टरों को जेल भेजा गया। नोएडा, कानपुर नगर और गाजियाबाद में भी कार्रवाई की गई।
गैस सिलेंडर फटने से इमारत में लगी आग

लखनऊ : राजधानी लखनऊ के डालीगंज इलाके की एक इमारत में गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। सिलेंडर का धमाका इतना भीषण था कि इमारत में दरारें पड़ गई। वहीं, आग बुझाने की कोशिश में एक व्यक्ति बुरी तरह झुलस गया। फायर ब्रिगेड की गाडि़यों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।