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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को टीम-9 के साथ की समीक्षा बैठक

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को टीम-9 के साथ समीक्षा बैठक में अफसरों से प्रदेश में कोरोना की स्थिति पर चर्चा की और निर्देश दिए साथ ही संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की नीति के अनुरूप किए जा रहे प्रयासों के संतोषजनक परिणाम मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एक ओर जहां औसतन दो लाख से ढाई लाख टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं, वहीं नए केस में गिरावट आई है। इसके साथ ही  स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विगत 24 घंटे में प्रदेश में 26,780 नए केस की पुष्टि हुई जबकि 28,902 कोविड संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो गए। अब तक11,51,571 प्रदेशवासियों ने कोविड से लड़ाई जीत ली है। वर्तमान में कुल 2,59,844 एक्टिव केस हैं। बीते 30 अप्रैल को एक्टिव केस की संख्या सर्वाधिक थी, जब प्रदेश में 03 लाख 10 हजार 783 केस थे। आज 6 दिन की अवधि में इसमें 50 हजार से अधिक की गिरावट आई है। 24 घंटे में 2,25,670 टेस्ट किये गए, इसमें 112000 आरटीपीसीआर माध्यम से हुए। सभी प्रदेशवासी कोविड विहैवियर को जीवनशैली में शामिल करें। शासन-प्रशासन के निर्देशों को मानें और चिकित्सकों के परामर्श से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करें। कोविड टीकाकरण का कार्य प्रदेश में सुचारू रूप से चल रहा है। अब तक 01 करोड़ 32 लाख 55 हजार 955 वैक्सीन डोज एडमिनिस्टर किए जा चुके हैं। सतत प्रयासों से वैक्सीन वेस्टेज में कमी आई है। इसे और बेहतर करने की जरूरत है। 18-44 आयु वर्ग के 68536 लोग अब तक वैक्सीनेट ही चुके हैं। इस आयु वर्ग की सक्रिय भागीदारी का ही परिणाम है कि इस वर्ग में वैक्सीन वेस्टेज 0.39% ही है। इसे शून्य पर लाने की जरूरत है।अधिक संक्रमण दर वाले सात जिलों में 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण चल रहा है। इसे चरणबद्ध रूप से विस्तार दिया जाए। अगले सप्ताह से सभी नगर निगमों और गौतमबुद्ध नगर में 18-44 आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण का कार्यक्रम संचालित किया जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के 97 हजार राजस्व गांवों में घर-घर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग का महाभियान शुरू हो गया है। निगरानी समितियों की स्क्रीनिंग में लक्षणयुक्त पाए गए 69,474 लोगों का जब एंटीजन टेस्ट किया गया तो 3551 पॉजिटिव मिले। इन्हें, मेडिकल किट प्रदान कर, सतर्कता के उपाय बताकर होम आइसोलेट किया गया। टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से चिकित्सक गण इनसे सतत संपर्क में रहें।आवश्यकतानुसार इन्हें हायर मेडिकल फैसिलिटी भी दिलाई जाए। गांव-गांव टेस्टिंग का यह अभियान गांवों को संक्रमण से बचाने में बहुत उपयोगी है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र में टेस्टिंग यथावत जारी रहे। निगरानी समितियों से लगातार संपर्क में रहें। संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए हमें कांटेक्ट ट्रेसिंग को और प्रभावी बनाना होगा। सभी जिलों में कांटेक्ट ट्रेसिंग को बेहतर करने की कार्रवाई हो।

विशेषज्ञों के आकलन के दृष्टिगत हमें सभी तरह की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। ऐसे में बेड, मैनपॉवर, चिकित्सकीय उपकरण, ऑक्सीजन और दवाओं की उपलब्धता वर्तमान क्षमता के सापेक्ष न्यूनतम दोगुना करने की कार्रवाई तेज हो। प्राथमिकता वाले इन कार्यों के लिए सचिव स्तर के अलग-अलग अधिकारियों को नामित किया जाए। किसी भी जिले में इनका कोई अभाव न हो। इस संबंध में मिशन मोड में कार्य करने की जरूरत है। अस्पतालों में चिकित्सकीय उपकरणों की सतत मॉनीटरिंग होनी चाहिए। सुरक्षा संबंधी उपकरणों के रख रखाव की समुचित व्यवस्था की जाए।

प्रदेश में कुछ जिलों में निजी अस्पतालों द्वारा तय दरों से अधिक शुल्क लेने, बेड खाली होने के बाद भी मरीजों को भर्ती करने से इनकार, ऑक्सीजन की उपलब्धता के बाद भी अनावश्यक अभाव बताकर भय का माहौल बनाने जैसी घटनाएं संज्ञान में आई हैं। आपदाकाल में यह न केवल निंदनीय है, बल्कि अपराध भी है। यह अक्षम्य हैगाजियाबाद और लखनऊ में स्थानीय प्रशासन ने ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई भी की है। ऐसे सभी प्रयासों पर सख्त नजर रखी जाए। यह सुनिश्चित करें कि मरीज और उसके परिजन के साथ संवेदनशील व्यवहार हो। उत्पीड़न, शोषण अथवा अवैध वसूली की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए।  नॉन कोविड मरीजों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सभी इंतज़ाम किए जाएं। गंभीर रोगों से ग्रसित मरीज हों अथवा गर्भवती महिलाओं की आपात आवश्यकता, सभी की लिए समुचित चिकित्सा प्रबंध कराए जाएं। हर जिले में न्यूनतम एक अस्पताल ऐसे मरीजों के लिए डेडिकेट किया जाए। जरूरत पर एम्बुलेंस भी उपलब्ध कराए जाएं।

योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण के प्रयास और तेज कर दिए

लखनऊ : कोरोना संकट काल में गोवंशों की चिंता करते हुए योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण के प्रयास और तेज कर दिए हैं। हर जिले में कोविड हेल्प डेस्क का निर्माण किया गया है। हेल्प डेस्क पर पशुओं के लिए भी थर्मल स्कैनर, ऑक्सीमीटर की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रदेश के नागरिकों के साथ गोवंशों की भी उचित देखभाल और उनके आश्रय का समुचित प्रबंध सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कर रही है।मुख्यमंत्री योगी की कोशिशों से गो आश्रय स्थलों, गोशालाओं में बड़े पैमाने पर निराश्रित गोवंशों को आश्रय मिल रहा है। सरकार तेजी से इन गोशालाओं और गो आश्रय स्थलों की संख्या में वृद्धि कर रही है। ताकि अधिक से अधिक गोवंशों को आश्रय दिया जा सके और प्रदेश को छुट्टा जानवरों की समस्या से निजात दिलाया जा सके।यूपी पशुपालन विभाग के प्रयासों से प्रदेश में 5268 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां पर 5,73,417 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। जिनमें गांव और शहर मिलाकर 4,529 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों पर 4,64,311 गोवंश संरक्षित किए गए। वहीं 161 कान्हा गोशालाओं में 40,640 गोवंश, 407 कांजी हाउसों में 10,827 गोवंश संरक्षित किए गए। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 171 वृहद गो-संरक्षण केन्द्र व गोवंश वन्य विहार का निर्माण किया गया है जिनमें 57,639 गोवंश संरक्षित हैं।बेसहारा गौ माता को आश्रय दिलाने की मंशा से संचालित मुख्यमंत्री निराश्रित व बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 85,869 गोवंश सुपुर्दगी में दिए गए हैं और करीब 44,651 पशुपालक इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।

प्रदेश की भविष्य की पीढ़ी को कुपोषण से मुक्त कराने के दृढ़ संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से पोषण मिशन अभियान के तहत प्रदेश में 1,637 कुपोषित परिवारों को 1,646 दुधारू गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। साथ ही प्रदेश की 553 पंजीकृत और 377 क्रियाशील पंजीकृत गोशालाओं में 1,05,380 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा 304 अपंजीकृत गोशालाओं में 47,040 गोवंश संरक्षित हैं। कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के समस्त जिलों में करीब 700 हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साथ ही पशुओं की देखभाल और जांच के लिए 51 ऑक्सीमीटर एवं 341 थर्मल स्केनर की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।

प्रशासन के पोर्टल पर सैकड़ों बेड खाली, मरीजों के पहुंचने पर नहीं किया जाता भर्ती, आंकड़ों में खेल जारी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कोरोना की स्थिति बेकाबू है। यहां अस्पतालों में बेड, स्टोरों में दवाइयां, सांस लेने के ऑक्सीजन और यहां तक की अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाटों तक सिर्फ किल्लत और कतारें ही हैं। हालांकि, प्रशासन अपनी नाकामी को छिपाने के लिए लगातार आंकड़ों से खेल करने से बाज नहीं आ रहा है।प्रशासन द्वारा संचालित पोर्टल पर तो अस्पताल में खाली बेड़ों की भरमार है लेकिन मरीजों के अस्पताल पहुंचने पर उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा है। राजधानी में संचालित तमाम कोविड अस्पतालों में प्रशासन बेड खाली होने का दावा करता है, लेकिन हकीकत दावों के बिलकुल उलट नजर आ रही है। गंभीर मरीज भी अस्पतालों से लौटाए जा रहे हैं।

प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों की बात करें तो केजीएमयू में 54, पीजीआई में 28, लोहिया में 56, बलरामपुर में 75, इंटीगल में 250, लोकबंधु में 21 बेड खाली दिखाए जा रहे हैं। यही नहीं एरा में 125, प्रसाद में 196, कैरियर में 105, विवेकानंद अस्पताल में 17 बेड खाली दर्शाएं गए हैं। लेकिन जब परिजन अपन मरीज को लेकर मौके पर पहुंचते हैं तो उनके मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। स्थिति साफ़ है कि, प्रशासन आंकड़ों से खेल कर रहा है। गौरतलब है कि, वैसे तो पूरे देश में कोरोना के कहर से कोहराम मचा हुआ है। लेकिन 10 प्रदेश में स्थितियां कुछ ज्यादा ही बदतर हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। यूपी की राजधानी लखनऊ में कोरोना से जूझ रहे मरीजों और उनके तीमारदारों की हालत काफी बुरी है। यहां मरीज एक-एक सांस के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। सुबह से ही ऑक्सीजन प्लांटों के बाहर भारी भीड़ जमा हो जाती है।

निर्दलीयों और बागियों के बूते बोर्ड बनाएगी भाजपा

लखनऊ : जिला पंचायत सदस्य चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद अब भाजपा ने निर्दलीय और बागियों के अलावा दूसरे दलों में सेंधमारी के बूते जिला और क्षेत्र पंचायतों में अपना बोर्ड बनाने की रणनीति बनाई है। मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों में निर्दलीयों व बागियों को साधने और दूसरे दलों के सदस्यों को तोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा ने प्रदेश की 75 जिला पंचायतों की 3050 सीटों में से 3034 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के क्षेत्र जालौन, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के क्षेत्र प्रयागराज, ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह के क्षेत्र प्रतापगढ़, पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी के जिले मुरादाबाद, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के क्षेत्र देवरिया में भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।

अब क्षेत्र पंचायतों में अध्यक्ष पद के जिस उम्मीदवार के साथ ज्यादा सदस्य होंगे पार्टी उसे अपना समर्थन देगी। वहीं, जहां कहीं पार्टी के काडर के पुराने कार्यकर्ता को क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष बनाना होगा उसके लिए पार्टी अपनी तरफ से हरसंभव कोशिश करेगी भविष्य में सरकार या संगठन में जगह देने, परिवार के सदस्य को निगम, बोर्ड, आयोग में सदस्य बनाने सहित अन्य तरीकों से साधा जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी अब क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में अपना बोर्ड बनाने में जुटेगी।

विधानसभा चुनाव से नौ महीने पहले हुए पंचायत चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से पार्टी के विधायकों की जमीन हिल गई है। 403 में से 309 विधायक भाजपा के हैं, इनमें से अधिकांश विधायक ग्रामीण क्षेत्रों से निर्वाचित हैं पार्टी ने टिकट वितरण में बड़ी संख्या में विधायकों और सांसदों की सिफारिश पर टिकट दिए हैं। उसके बाद परिणाम भले ही किसान, कोरोना और कर्मचारियों की नाराजगी के मुद्दे के आधार पर अच्छे नहीं रहे हों, लेकिन इन परिणामों ने विधायकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

75 में से 74 जिला पंचायतों में अध्यक्ष की कुर्सी पर किस दल के सदस्य की ताजपोशी होगी

लखनऊ: यूपी के जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सतारुढ़ दल भाजपा और सपा पर भारी रहे है। प्रदेश की 75 में से 74 जिला पंचायतों में अध्यक्ष की कुर्सी पर किस दल के सदस्य की ताजपोशी होगी उसमें निर्दलीय ही निर्णायक भूमिका निभाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने का एलान कर दिया है। जिला पंचायत की 3050 सीटों पर हुए चुनाव के लिए तीन दिन तक चली मतगणना के बाद सामने आई तस्वीर में सपा को करीब 700 सीटें मिली हैं जबकि भाजपा को 600 के अंदर ही सब्र करना पड़ा है जबकि निर्दलीयों ने 950 के करीब सीटों पर कब्जा जमाया है।

भाजपा और सपा को जिलों में अपने जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए निर्दलीयों को ही मनाना पड़ेगा। प्रदेश के कुछ जिलों में निर्दलीय सदस्य भी जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हो सकते है नवनिर्वाचित निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य भी फिलहाल असमंजस की स्थिति में है। बड़ी संख्या में ऐसे निर्दलीय सदस्य हैं जो सतारुढ़ दल भाजपा को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते है। वे सतारुढ़ दल के साथ ही रहकर आगामी नौ महीने तक सत्ता सुख का आनंद लेना चाहते हैं। वहीं, कुछ ऐसे प्रभावशाली सदस्य भी हैं जो मानते हैं कि अभी तन, मन और धन लगाकर यदि भाजपा के बैनर पर जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद यदि 2022 में सत्ता का ऊंट दूसरी करवट बैठा तो उनकी कुर्सी भी तलवार लटक सकती है।

देश भर में लखनऊ विश्वविद्यालय की 58वीं रैंकिंग

लखनऊ : हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एससीआई मैगो इंस्टीट्यूशंस रैंकिंग में बेहतर स्थान प्राप्त करने के बाद लविश्वविद्यालय ने बेहतर प्रदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग एजेंसी edurank.org द्वारा जारी रैंकिंग में यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों में सबसे बेहतर स्थान पाया है। साथ ही देश भर के विश्वविद्यालयों में 58वीं रैंक हासिल की है। रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर लखनऊ विश्वविद्यालय से ऊपर जो 57 विश्वविद्यालय व संस्थान हैं उनमें ज्यादातर आईआईटी, तकनीकी विश्वविद्यालय/संस्थान या इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच स्थान बनाने पर हर्ष जताया है। विवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि हाल के दिनों में विश्वविद्यालय द्वारा शोध के क्षेत्र में किए गए बेहतर कार्य, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के क्षेत्र में, क्वालिटी ऑफ एजुकेशन, बेहतर सुविधाएं देने व व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जो प्रयास किए गए हैं।

यह उसका प्रतिफल है और विश्वविद्यालय प्रशासन आगे भी इसे जारी रखने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग एजेंसी के रिकॉर्ड के अनुसार लखनऊ विश्वविद्यालय को दुनिया के शीर्ष 25% विश्वविद्यालयों में जगह मिली है। उत्तरप्रदेश से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, आईआईटी बीएचएमएनआईटी इलाहाबाद, आईआईटी कानपुर व एमिटी नोएडा को भी इस रैंकिंग में स्थान प्राप्त हुआ है। बीएचयू एवं एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जबकि आईआईटी बीएचयू, आईआईटी कानपुर एवं एमएनआईटी इलाहाबाद तकनीकी संस्थान है। उन्होंने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय को एशिया के समस्त संस्थानों में 1008वें स्थान पर रखा गया है। edurank.org द्वारा जारी रैंकिंग में दुनिया भर के 14178 विश्वविद्यालय शामिल रहे हैं, जो उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, जापान, मैक्सिको, ओसियाना क्षेत्रों के हैं।

एयरपोर्ट पर 64.68 लाख रुपये का सोना बरामद

लखनऊ: अमौसी एयरपोर्ट पर बुधवार को दुबई से आये दो यात्रियों के पास से कस्टम की टीम ने 64.68 लाख रुपये का सोना बरामद किया। कस्टम उपायुक्त निहारिका लाखा ने बताया कि एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या एआई 936 से आये यात्रियों की स्क्रीनिंग के दौरान दौरान एक महिला व पुरुष यात्री पर शक हुआ। जब उनसे पूछताछ की गई तो उनके पास 1312 ग्राम सोना मिला। इसकी कीमत 64.68 लाख रुपये है।

 

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