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राजस्व परिषद के मुखिया का पद 15 दिन से खाली

लखनऊ : राजस्व परिषद के चेयरमैन का पद पिछले 15 दिनों से खाली है। सरकार इसके लिए किसी अफसर का नाम तय नहीं कर पा रही है। यह पद मुख्य सचिव के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदेश का पूरा राजस्व प्रशासन इसी के अधीन काम करता है और प्रदेश के समस्त कलेक्टर व कमिश्नर सीधे चेयरमैन के प्रति जवाबदेह माने जाते हैं।  इस पद पर मुख्य सचिव स्तर (अपर मुख्य सचिव) के ही किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की तैनाती की परंपरा रही है। कई बार मुख्य सचिव के पद से हटाए गए अधिकारी परिषद के चेयरमैन बनाए गए हैं। जावेद उस्मानी, अनूप मिश्रा जैसे कई अफसर मुख्य सचिव बनने के बाद परिषद के चेयरमैन बने। कई बार परिषद में इस तरह तैनाती हुई हैं कि उसे सरकार की नाराजगी के तौर पर समझा जाता रहा है। नतीजा यह होता है कि आसानी से कोई अफसर परिषद आना नहीं चाहता। 29 अप्रैल को राजस्व परिषद के तत्कालीन चेयरमैन दीपक त्रिवेदी का निधन हो गया था। 30 अप्रैल को वे सेवानिवृत्त होने वाले थे। तभी से यह कुर्सी खाली है। बताया जा रहा है इस पद के लिए जो नाम लाइन में है उनमें से एक को छोड़ कर ज्यादातर शासन स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कई तो मुख्य सचिव की कुर्सी की दौड़ में शामिल बताए जाते हैं।

प्रदेश की शीर्ष ब्यूरोक्रेसी में मुख्य सचिव के बदलने की अटकलें काफी दिनों से चल रही हैं। राजस्व परिषद चेयरमैन की तैनाती में देरी से इस अटकलबाजी को फिर हवा मिलने लगी है। जानकार बताते हैं कि यदि सरकार को मुख्य सचिव बदलने की ही रणनीति सही नजर आए तो पूर्व के कुछ मुख्य सचिवों की तरह आरके तिवारी को राजस्व परिषद भेजने का मुफीद विकल्प होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो प्रदेश में कार्यरत 1985 या 1986 बैच के आईएएस अधिकारियों में से किसी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

मो. इफ्तेखारुद्दीन : 1985 बैच के हैं और तिवारी के बाद सबसे वरिष्ठ हैं। वर्तमान में उप्र. राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

आलोक सिन्हा : 1986 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और कृषि उत्पादन आयुक्त के अलावा अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत जैसे महत्वपूर्ण विभाग देख रहे हैं।

मुकुल सिंघल : 1986 बैच के हैं और लगभग तीन वर्ष से अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक की जिम्मेदारी देख रहे हैं। एक दिसंबर, 2020 से राजस्व परिषद के सदस्य भी हैं। वे परिषद के वरिष्ठम सदस्य हैं।

कुमार कमलेश : 1986 बैच के हैं और अपर मुख्य सचिव नियोजन, कार्यक्रम क्रियान्वयन व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जिम्मेदारी देख रहे हैं। 30 जून को वे रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में उन्हें बोर्ड में भेजने की कोई संभावना नजर नहीं आती।

अवनीश अवस्थी : 1987 बैच के हैं और मुख्यमंत्री के चुनिंदा करीबी अफसरों में शामिल हैं। अपर मुख्य सचिव गृह, गोपन व कारागार के साथ यूपीडा के सीईओ हैं।

ब्लैक फंगस जानलेवा होता जा रहा लखनऊ में निजी अस्पताल में इलाज

लखनऊ :गोरखपुर जिले में ब्लैक फंगस जानलेवा होता जा रहा है। लखनऊ में निजी अस्पताल में इलाज करा रहे गोरखपुर के 54 वर्षीय मरीज की रविवार को मौत हो गई। ब्लैक फंगस का संक्रमण उनके दिमाग तक पहुंच गया था। कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद उनमें ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने लगे थे। उन्हें मेडिकल कॉलेज रोड स्थित निजी अस्पताल से रेफर किया गया था। वहीं, तारामंडल स्थित शाही ग्लोबल हास्पिटल में ब्लैक फंगस के लक्षणों वाला एक मरीज मिला है। कोरोना संक्रमण से हालत गंभीर होने पर 10 दिन पहले गगहा क्षेत्र निवासी 42 वर्षीय युवक को भर्ती कराया गया था। युवक की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव हो गई है लेकिन वह ब्लैक फंगस की चपेट में आ गया है। युवक की नाक से काला पानी आ रहा है। कभी-कभी खून भी आ जा रहा है। इलाज के लिए दवा न मिलने से डाक्टर और स्वजन परेशान हैं।शाही ग्लोबल हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ. एसएस शाही ने बताया कि युवक की कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई है लेकिन उसमें ब्लैक फंगस के लक्षण दिख रहे हैं।

बोर्ड परीक्षाओं पर मई अंत तक होगा निर्णय

लखनऊ : यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग कई विकल्पों पर काम कर रहा है। विभाग के अधिकारी जल्द ही अपना प्रस्ताव सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। मई के अंतिम सप्ताह तक सरकार इस पर निर्णय ले सकती है। बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि एक विकल्प यह है कि जुलाई के पहले सप्ताह से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट दोनों की परीक्षा कराई जाए। एक विकल्प हाई स्कूल की परीक्षा रद्द कर इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने का है। तीसरा विकल्प स्कूलों की ओर से भेजे गए आंतरिक मूल्यांकन के अंकों के आधार पर बोर्ड परीक्षा के अंक देकर प्रमोट करने का है।

चौथा विकल्प है कि सीबीएसई की तर्ज पर पांच-पांच  शिक्षकों की कमेटी गठित कर मूल्यांकन कराकर परिणाम जारी किया जाए। इंटर की परीक्षा को लेकर विभाग सीबीएसई के निर्णय का इंतजार कर रहा है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि 20 मई के बाद बैठक कर मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा।कई जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से लेकर यूपी बोर्ड और शासन के अधिकारी कोरोना संक्रमित हैं। कुछ अधिकारी पोस्ट कोविड दिक्कतों से जूझ रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बीच 56 लाख परीक्षार्थियों की परीक्षा को सोशल डिस्टेसिंग के साथ कराना चुनौती है। आगामी शैक्षिक सत्र में ज्यादा विलंब नहीं हो इसके लिए परीक्षा कराने के साथ समय परिणाम जारी करना भी चुनौती है।

प्रधानी के चुनाव में विरोध करने पर युवक को मारी गोली

सीतापुर :जिले में प्रधानी के चुनाव में विरोध करने के चलते एक युवक को गोली मार दी। गंभीर हालत में उसे लखनऊ रेफर किया गया है। मामले की जानकारी पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और अभियुक्तों की तलाश में जुटी हुई है। जिले के थाना इमलिया सुल्तानपुर इलाके के गांव देवरिया गाड़ीघाट में बीती रात प्रधानी में विरोध करने के चलते गांव के संजय पुत्र भीखम के गोली मार दी। ग्रामीणों के अनुसार धनपाल व देवशंकर और संजय की बहुत अच्छी दोस्ती थी। मगर इस बार प्रधानी के चुनाव में धनपाल व देवशंकर का समर्थन न करके गांव के अन्य प्रत्याशी का समर्थन कर रहा था। संजय का प्रत्याशी प्रधानी का चुनाव जीत गया। जिसकी रंजिश के चलते बीती रात संजय जब घर वापस जा रहा था तो पहले से घात लगाकर बैठे लोगों ने गोली मार दी। गोली संजय के पेट में लगी गोली चलने की सूचना पर महोली, हरगांव व इमलिया सुल्तानपुर पुलिस मौके पर पहुंच गयी। घायल संजय को जिला अस्पताल भेजा गया। जहां स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। इमलिया पुलिस ने बताया कि मामला पुरानी रंजिश का है। गोली मारने वाले संदिग्धों की तलाश चल रही है। तहरीर मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।

शासन ने बेसिक शिक्षा को छोड़कर 20 मई से स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की अनुमति दी

लखनऊ : शासन ने बेसिक शिक्षा को छोड़कर 20 मई से स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की अनुमति दी है, लेकिन निजी स्कूल संगठन 17 मई से ही ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने पर अड़े हैं। यही नहीं वह सभी कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सभी कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई की अनुमति मिले तभी वे 20 के बाद कक्षाएं शुरू करेंगे। निजी स्कूलों के संगठन अन एडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने शासन के आदेश का विरोध करते हुए 17 मई से ही सभी कक्षाओं के लिए ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। संगठन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि शासन ने साफ तौर पर नहीं लिखा है कि किस कक्षा से पढ़ाई शुरू करनी है। आदेश में बेसिक शिक्षा को छोड़ कर बाकी कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई की अनुमति दी है। ऐसे में यह माना जाए कि स्कूल कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई करा सकते हैं। स्कूल खोलना नहीं है और घर से ही शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने की मांग की जा रही है,

ऐसे में शासन द्वारा आठवीं तक के छात्रों को अनुमति न देना समझ से परे है। जब कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षक घर बैठे पढ़ा सकते हैं तो कक्षा 8 तक के शिक्षक क्यों नहीं पढ़ा सकते। इसका जवाब शासन के पास नहीं है। उन्होंने बताया कि निजी स्कूल शासन के इस आदेश का विरोध करते हैं और 17 मई से ही सभी कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। हालांकि, जिन स्कूलों ने अभी व्यवस्था नहीं की है वे बाद में शुरू कर सकते हैं। अनिल अग्रवाल ने बताया कि शासन पहले ही वर्क फ्रॉम होम का आदेश दे चुका है। ऐसे में यदि शिक्षक पढ़ा नहीं सकता तो वह कौन सा कार्य करे, इसका भी उल्लेख शासनादेश में करना चाहिए था। छात्र और अभिभावक भी लगातार सवाल कर रहे हैं कि पढ़ाई कब शुरू होगी। छात्र हित को देखते हुए सभी कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं।

इधर, अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों के निर्णय का विरोध किया है। लखनऊ अभिभावक विचार परिषद के अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि शासन ने 20 मई से कक्षा 9 से 12 तक की ऑनलाइन पढ़ाई का आदेश दिया है, लेकिन निजी स्कूल संगठन 17 मई से सभी कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई पर अड़ा है। निजी स्कूल संगठन खुद को शासन से ऊपर समझ रहा है। अभिभावक संघ स्कूलों के निर्णय का विरोध करता है।

दिल्‍ली की तरह यूपी में भी जरूरतमंद लोगों को एंबुलेंस से लेकर दवा और भोजन मुहैया कराएंगे आप कार्यकर्ता

वर्चुअल बैठक में प्रदेश प्रभारी राज्‍यसभा सांसद ने विभिन्‍न जिलों के पदाधिकारियों को दिए निर्देश, बनारस में शुरू हो चुका है सेवा कार्य

लखनऊ : दिल्‍ली की तर्ज पर आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कोरोना महामारी से त्राहि-त्राहि कर रही यूपी की जनता को भी मदद मुहैया कराएंगे। बीमार लोगों को एंबुलेंस के जरिए अस्‍पताल पहुंचाने से लेकर हर जरूरतमंद के लिए दवा और भोजन का इंतजाम करने का निर्देश शनिवार को प्रदेश कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक में पार्टी के यूपी प्रभारी राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने दिए।संजय सिंह ने कहा कि महामारी के इस कठिन दौर में पार्टी के साथी लोगों की मदद के पुनीत अभियान में जुट जाएं। उन्‍होंने दिल्‍ली में अपनी ओर से शुरू किए गए प्रयास की जानकारी देते हुए यूपी के लोगों की मदद के लिए संगठन के साथियों से स्‍थानीय स्‍तर पर ऐसे प्रयास करने का निर्देश दिया  । कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिका‍री इस मुश्किल दौर में अपने संसाधनों से जरूरतमंदों की मदद करने का इंतजाम करें। इसके लिए कोई अपने क्षेत्र में ऑटो सेवा शुरू करके मरीजों को अस्‍पताल पहुंचाने का काम कर सकता है, तो कोई जरूरतमंदों के लिए भोजन का इंतजाम करके कोरोना से जारी लड़ाई में अपना योगदान दे सकता है। डॉ की टीम फोन से कोरोना मरीजों की मदद करेगी । संजय सिंह ने कई पदाधि‍कारियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा लक्षणों वाले संदिग्‍ध मरीजों को दवाएं मुहैया कराए जाने की जानकारी भी दी। बताया कि टीम बनारस की ओर से कोविड 19 मरीजों की मदद के लिए ऑटो एंबुलेंस सेवा दी जा रही हैं। उन्‍होंने सभी जिलों की टीमों से अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे प्रयास शुरू करने का आह्वान किया।

सूर्यप्रताप सिंह पर दर्ज मुकदमे की भर्त्‍सना

गंगा में उतराते शवों को लेकर आईएएस सूर्यप्रताप सिंह पर मुकदमा दर्ज कराए जाने पर संजय सिंह ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। कहा कि इस सरकार में जो भी सच बोलने की हिम्‍मत करता है, सरकार उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज करा देती है। लोगों को सच बोलने से रोकने के लिए यह सरकार उन पर देशद्रोह तक की धाराएं लगाकर उन्‍हें देशद्रोही साबित करने में जुट जाती है। वरिष्‍ठ आईएएस अफसर सूर्यप्रताप सिंह पर भी सरकार की ओर से ऐसी ही कार्रवाई की गई है। सरकार के इस कदम की जितनी भी भर्त्‍सना की जाए, कम है। आम आदमी पार्टी सूर्यप्रताप सिंह के साथ खड़ी है। सरकार को अविलंब उन पर दर्ज मुकदमा वापस लेना चाहिए। संजय सिंह ने सूर्यप्रताप सिंह से उनके आवास पर मुलाकात करके उन पर की गई कार्रवाई की निंदा की। कहा कि पार्टी बेखौफ होकर सच बोलने के उनके जज्‍बे की सराहना करती है और सरकार की ओर से उनके खिलाफ की गई दमनात्‍मक कार्रवाई के खिलाफ हर कदम पर साथ खड़ी है। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह, प्रदेश महासचिव दिनेश पटेल, प्रदेश कार्यकारणी के सभी सदस्य, प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष और सभी प्रवक्ता शामिल हुए

वैज्ञानिक शाहिद जमील का इस्तीफा, कोरोना से जंग में रणनीति बनाने वाले ग्रुप में थे चीफ

लखनऊ :जाने-माने विषाणु विज्ञानी शाहिद जमील ने कोरोना वायरस की जीनोम श्रृंखला का पता लगाने वाली केंद्र सरकार की समिति INSACOG के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि कुछ दिन पहले जमील ने कहा था कि वैज्ञानिकों को साक्ष्य आधारित नीति निर्णय के प्रति अड़ियल रवैये का सामना करना पड़ रहा है। गत शुक्रवार को आईएनएससीओजी की बैठक हुई थी। इसमें मौजूद अधिकारियों में से दो ने बताया कि उसी बैठक में जमील ने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। फोन कॉल और संदेशों का जमील की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि जमील ने इस्तीफा देने के पीछे कोई कारण नहीं बताया है।

पिछले हफ्ते शाहिद जमील ने न्यूयॉर्क टाइम्स’ में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बारे में एक लेख लिखा था। उक्त लेख में उन्होंने लिखा था, भारत में मेरे साथी वैज्ञानिकों के बीच इन उपायों को लेकर खास समर्थन है। लेकिन साक्ष्य आधारित नीति निर्माण के प्रति उन्हें अड़ियल रवैये का सामना करना पड़ रहा है। 30 अप्रैल को 800 से अधिक भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की थी उन्हें आंकड़े उपलब्ध करवाए जाएं ताकि वे आगे अध्ययन कर सकें, अनुमान लगा सकें और इस वायरस के प्रकोप को रोकने के प्रयास कर सकें उन्होंने कहा, भारत में वैश्विक महामारी काबू से बाहर हो चुकी है, ऐसे में आंकड़ों पर आधारित नीति निर्णय भी खत्म जैसा ही है। इसकी मानवों से संबंधित जो कीमत हमें चुकानी पड़ रही है उससे होने वाली चोट स्थायी निशान छोड़ जाएगी।

दी इंडियन सार्स-सीओवी2 कॉनसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (आईएनएसएसीओजी) दस राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का समूह है जिसकी स्थापना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बीते वर्ष 25 दिसंबर को की थी। इस समिति का काम है कोरोना वायरस की जीनोम श्रंखला तैयार करना और जीनोम के स्वरूपों तथा महामारी के बीच संबंध तलाशना। हालांकि देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बाद समिति की आलोचना की जाने लगी। इस महीने की शुरुआत में जमील ने रॉयटर्स से कहा था, मुझे चिंता इस बात की है कि नीति निर्माण के लिए वैज्ञानिक पहलू पर विचार नहीं किया जा रहा। मैं भलीभांति जानता हूं कि मेरा अधिकार क्षेत्र कहां तक है। एक वैज्ञानिक होने के नाते हम साक्ष्य दे सकते हैं लेकिन नीति निर्माण का काम सरकार का है।

आधे घंटे में ही अगले 6 दिनों का वैक्सीनेशन का स्लॉट फुल

लखनऊ:  राजधानी में वैक्सीनेशन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। जबसे 18 वर्ष से 44 वर्ष वालों का वैक्सीनेशन शुरू हुआ है, तब से बड़ी संख्या में लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। रविवार को भी अगले 6 दिनों के लिए होने वाले वैक्सीनेशन के सभी स्लॉट सिर्फ आधा घंटा में ही फुल हो गए। अब अगले रविवार को दोबारा स्लॉट खुलेंगे।

सेकंड डोज के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं

इम्युनाइजेशन के नोडल इंचार्ज डॉ। एमके सिंह ने बताया कि इस बार 49 सेंटर्स पर वैक्सीन लगाई जाएगी। इसबार कोविशील्ड और को-वैक्सीन दोनों लगाई जाएंगी। जिसमें 42 सेंटर्स पर कोविशील्ड और 7 सेंटर्स पर को-वैक्सीन लगाई जाएगी। हालांकि 45 वर्ष से ऊपर वालों के लिए वैक्सीनेशन पहले की ही तरह चलता रहेगा। अब कोविशील्ड की दूसरी डोज 12 से 16 सप्ताह के बाद और को-वैक्सीन 28 दिनों के बाद लगाई जाएगी। इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने की कोई जरूरत नहीं है। अपने सेंटर्स पर सीधे जाकर दूसरी डोज लगवा सकते हैं।

पंचायत चुनाव ड्यूटी के समय मृत्यु हुए कर्मियों के परिजनों को अनुदान दे सरकार-अजय कुमार लल्लू

शिक्षको के साथ शिक्षामित्रों अनुदेशकों रसोईया के परिवारों को दिया जाए अनुदानअजय कुमार लल्लू

मृतक शिक्षामित्रों अनुदेशकों रसोइयों के आश्रितों को दी जाए सरकारी नौकरीअजय कुमार लल्लू

पंचायत चुनाव ड्यूटी में मृतक कर्मियों में भेदभाव रहित मदद करे सरकार-अजय कुमार लल्लू

लखनऊ :  उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के  अध्यक्ष  अजय कुमार लल्लू ने राज्य की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले शिक्षकों के समान शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों को एक समान अनुदान देने की मांग करते हुए कहा कि कोरोना की सरकार जनित त्रासदी में यह जान गंवाने वाले सभी लोगों के साथ समान नीति के अंतर्गत न्याय होना चाहिये। उन्होंने कहा कि समान अनुदान के साथ मृतक शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों के आश्रितों को सरकारी नौकरी भी दी जाए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  अजय कुमार लल्लू ने कहा कि पंचायत चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों व अन्य कर्मियों के अतिरिक्त 200 शिक्षामित्रों, 99 अनुदेशकों सहित लगभग 100 रसोइयों को पंचायत चुनाव ड्यूटी करते समय कोरोना संक्रमण हुआ और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी है। शिक्षकों व अन्य राज्य कर्मियों के लिये राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रत्येक के आश्रितों को 30 लाख रुपया प्रति कर्मी अनुदान घोषित किया है लेकिन उसमें शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों के लिये कोई राहत की घोषणा नहीं की, जिससे मृतको के आश्रितों के समक्ष रोजी रोटी का संकट है जिसके लिये राज्य सरकार पूरी तरह दोषी है।  अजय कुमार लल्लू ने कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान जान गंवाने वाले शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों के लिए राहत ही घोषणा न किया जाना समता के मूल सिद्धांत व मानवीय आधार पर अन्याय है इसलिये योगी सरकार असमानता व अन्याय के बजाय शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों के आश्रितों को समान नीति बनाकर अनुदान देने के साथ प्रत्येक जान गंवाने वाले के एक आश्रित को सरकारी नौकरी भी प्रदान करे जिससे उनके परिवार की आजीविका चल सके।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष  अजय कुमार लल्लू ने राज्य सरकार की पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों के साथ भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की भयावहता विकरालता के बावजूद राज्य सरकार ने जबर्दस्ती चुनाव कराये जिसके चलते संक्रमण से मौतें र्हुइं जिसके लिये राज्य सरकार पूरी तरह दोषी है, वहीं उसकी अनुदान नीति भी गलत है। अजय कुमार लल्लू ने मांग की है कि मृतक शिक्षकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये प्रति शिक्षक परिवार अनुदान के साथ मृतक आश्रित के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। इसके साथ ही राज्य सरकार को चाहिये कि शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों के परिवार को भी एक समान अनुदान देने के साथ प्रत्येक मृतक के एक आश्रित को सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए।

नाइट पार्टियों में ड्रग्स देने वाला तस्कर को एसटीएफ ने चिनहट से किया गिरफ्तार

लखनऊ:  में भी चोरी छिपे होने वाली नाइट पार्टियों में मैथाडोन नाम की ड्रग्स सप्लाई करने वाले तस्कर दानिश सिद्दकी को एसटीएफ ने शनिवार देर रात चिनहट में गिरफ्तार कर लिया। उसने खुलासा किया कि इसी साल अप्रैल में उसने काफी ड्रग्स अलग-अलग स्थान पर पार्टियां करने वाले लड़कों को बेची। वह अब तक पांच लाख रुपये से अधिक की मैथाडोन पार्टियों के लिये दे चुका है। दानिश के आका समेत चार लोगों की तलाश की जा रही हैएसटीएफ के एएसपी सत्यसेन ने बताया कि दानिश सिद्दिकी उर्फ ईश अली मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है। यहां वह चिनहट के मल्हौर स्थित यदुवंश हास्टल के रूम नम्बर 30 में रह रहा था। वह इस समय हजरतगंज में एक निजी संस्थान ने इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स कर रहा था। एसटीएफ को कई दिन से सूचना मिली थी कि चिनहट में कुछ लोग युवाओं को ड्रग्स उपलब्ध करा रहे हैं जिसका इस्तेमाल नाइट पार्टी में किया जा रहा है। इस पर ही एसटीएफ ने छापा मारा तो दानिश पकड़ा गया जबकि उसके साथी भाग निकले। दानिश के पास काफी मात्रा में ड्रग्स व 62 हजार रुपये बरामद हुए हैं।G

कुरियर से आती थी ड्रग्स

दानिश ने एसटीएफ को बताया कि वह दिल्ली में कुछ लोगों से ये ड्रग्स मंगवाता था। वहां से उसे 20 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के हिसाब से मिलती थी। भुगतान ऑनलाइन करने पर उसके आका दिल्ली से कुरियर के जरिये यह ड्रग्स उस तक भिजवाते थे। वह लखनऊ में चार से छह हजार रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से युवाओं को देता था।

कई युवा उसके नियमित ग्राहक

एएसपी सत्यसेन के मुताबिक दानिश ने कुबूला कि उसके सम्पर्क में लखनऊ के युवा ज्यादा थे। इनमें कई छात्र भी थे तो अक्सर उसके पास आते थे। ब यह भी पता किया जा रहा है कि लखनऊ में कहां-कहां नाइट पार्टी आयोजित हुई।दानिश इस बारे में नहीं बता सका। उसने कहा कि वह चिनहट में बुलाकर की लोगों को ड्रग्स देता था। एसटीएफ ने इस सम्बन्ध में चिनहट में एफआईआर दर्ज करा दी है। साथ ही दानिश से मिली जानकारी के आधार पर कई लोगों की तलाश की जा रही है।

लखनऊ में रिकॉर्डतोड़ 45 दिन में 42 करोड़ का बिक गया नारियल पानी

लखनऊ :  देश के समुद्र तटीय इलाकों में पैदा होने वाले नारियल पानी में वैसे तो सेहत का खजाना छिपा हुआ है, लेकिन इसकी डिमांड कोरोना काल में और भी अधिक बढ़ गई। इसकी वजह इसमें इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व हैं, जिसने महामारी के दौर में उसकी बिक्री सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ़ा दी आलम यह है कि सामान्य दिनों में एक नारियल पानी की कीमत जहां 30 रुपये से 40 रुपये हुआ करती थी वहीं, इस समय इसकी कीमत 60 रुपये से 80 रुपये पहुंच गई है इतना ही नहीं इस समय यह मार्केट में काफी मशक्कत के बाद ही आपको मिलेगा, इसकी वजह दिन पर दिन बढ़ती इसकी डिमांड है। जानकारों की मानें तो पिछले डेढ़ माह में 70 लाख नारियल जिसकी कीमत 42 करोड़ है, की बिक्री हुई है। मंडी सचिव की मानें तो इस साल नारियल की बिक्री में करीब 30 फीसद की उछाल आई है।

बंगाल के नारियल की शहर में धूम

राजधानी में उड़ीसा और बंगाल से सबसे ज्यादा नारियल पानी मंगवाया जाता है क्योंकि यह दक्षिण भारत, महाराष्ट्र से सस्ता पड़ता है। इसकी वजह यह है कि यहां से नारियल मंगवाने पर ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम आता है। हीं यहां के नारियल का साइज छोटा होता है, जिसमें 200 से 250 मिली लीटर तक ही होता है। वहीं दक्षिण भारत, महाराष्ट्र के नारियल का साइज बड़ा होता है, इसमें पानी की मात्रा औसतन 250 से 300 मिलीलीटर रहती है।

16 ट्रक नारियल की हो रही खपत

शहर में नारियल व्यवसाय से जुड़े कुल आठ बड़े आढ़ती हैं। इसमें गल्ला मंडी में छह, दुबगगा में एक और गोमती नगर में एक आढ़ती है। हालांकि मांग में आई उछाल को देखते हुए अन्य फल विक्रेता भी इस समय नारियल पानी, नींबू, माल्टा और कीवी की आपूर्ति करने लगे हैं। आम दिनों में एक आढ़ती के पास 2 दिन पर एक ट्रक नारियल की आवक आती थी जबकि इन दिनों प्रत्येक आढ़ती के पास रोजाना दो बड़े ट्रक से नारियल की आवक हो रही है। कारोबारी बताते हैं कि बड़े ट्रक में 15000 नग जबकि छोटी गाडि़यों पर 8000 से 10000 नग नारियल आता है। औसतन आठ आढ़तियों पर रोजाना 16 ट्रक नारियल की खपत वर्तमान में हो रही है।

साइज के अनुसार नारियल का रेट

खुदरा व्यापारी इन्हीं आढ़तियों से नारियल लेकर बाजारों में बेचते हैं। गैर कोरोना टाइम में जहां नारियल सौ नग 2200 से लेकर 2500 रुपए बिका करता था वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 36 सौ से 4000 रुपए हो चुकी है। ऐसे में छोटे दुकानदार उन नारियल की छटनी करके छोटा बड़ा के हिसाब से 50 रुपए से लेकर 80 रुपए तक प्रति नग बेच रहे हैं।

इसलिए है नारियल पानी की ज्यादा डिमांड

नारियल का सूखा हिस्सा हो या पानी वाली दोनों की सेहत के लिए कारगार है
नारियल हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है

इसमें पाया जाने वाला तत्व बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकता है

एक नग नारियल में 200 से 300 मिली पानी होता है

इसे लो कैलोरी ड्रिंक भी कहा जाता है क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है

इसमें अमीनो एसिड, एंजाइम, बी कांप्लेक्स, विटामिन, विटामिन सी समेत कई तत्व पाये जाते हैं

नारियल पानी के लाभ

नारियल पानी पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है

हाई बीपी को नियंत्रण में किया जाता है

कोलेस्ट्रॉल और फैट फ्री होने से दिल के लिए अच्छा

पोटेशियम मैग्नीशियम दिल और फेफड़े के लिए अच्छा

नारियल पानी शरीर में पानी की मात्रा को मेंटेन करता है

नारियल पानी हैंग ओवर से छुटकारा दिलाने में काफी कारगार है

वजन घटाने में भी फायदेमंद है

वैसे तो इन दिनों बाजार में नारियल की खूब बिक्री हो रही है, लेकिन विटामिन सी की पूर्ति करने वाले फलों की भी खूब मांग हो रही है। इसमें कीवी, संतरा, माल्टा, नींबू, मौसम्मी जैसे फलों की बाजार में खूब मांग हो रही है। लखनवाइट्स यहां दवाइयों के जरिये अपनी इम्यूनिटी मजबूत कर रहे हैं वहीं नेचुरल तरीके से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इन फलों की भी खूब बिक्री कर रहे हैं

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