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लखनऊ नगर निगम का सख्त रुख: आवारा पशुओं से हादसों पर पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी

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लखनऊ नगर निगम का सख्त रुख: आवारा पशुओं से हादसों पर पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी

लखनऊ: शहर में आवारा पशुओं से उत्पन्न समस्याओं पर सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम लखनऊ ने पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो और समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट में सामने आया कि गायों के झुंड ने एक वृद्ध व्यक्ति और एक बच्चे पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना ने शहर में आवारा पशुओं की समस्या को लेकर चिंता बढ़ा दी है।इस घटना का संज्ञान लेते हुए नगर निगम के पशु कल्याण विभाग ने तत्परता दिखाते हुए मौके का निरीक्षण कराया। जांच टीम ने शास्त्री नगर, कुण्डरी रकाबगंज क्षेत्र, खजुहा पुलिस चौकी के निकट घटना स्थल पर जाकर निरीक्षण किया और मौके से छह गाय और दो सांड पकड़कर उन्हें कान्हा उपवन में संरक्षित कर दिया। जांच में पता चला कि हमलावर गायों का स्वामित्व श्री राम सनेही पुत्र स्वर्गीय बाबूराम तिवारी तथा श्री पप्पी यादव पुत्र अज्ञात के पास था।जांच में यह भी सामने आया कि इन पशुपालकों ने अपनी गायों को खुले में छोड़ रखा था, जिससे वे सार्वजनिक स्थलों पर घूमते हुए लोगों को घायल कर रही थीं। खुले में छोड़े गए मवेशियों द्वारा लोगों को चोट पहुँचाना न केवल सार्वजनिक परेशानी (पब्लिक न्यूज़ेंस) की श्रेणी में आता है बल्कि पशु क्रूरता अधिनियम, 1960 का भी उल्लंघन है। इसके अलावा बिना लाइसेंस मवेशी पालना भी कानून के विरुद्ध है।नगर निगम ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर सहायक पुलिस आयुक्त बाजारखाला और थानाध्यक्ष बाजारखाला को सौंपते हुए संबंधित पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि शहर में पालतू पशुओं को खुले में छोड़ना गंभीर अपराध है। इससे न केवल जन-धन की हानि होती है बल्कि यातायात व्यवस्था और शहर की स्वच्छता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।नगर निगम ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि कोई पशुपालक अपने मवेशियों को सार्वजनिक स्थानों पर छोड़ता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने पालतू पशुओं को सड़क या सार्वजनिक स्थल पर न छोड़ें। यह न केवल कानूनी अपराध है बल्कि दूसरों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ गंभीर मामला है।नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत लापरवाही बरतने वाले पशुपालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और शहर में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।इस घटनाक्रम ने शहर में आवारा पशुओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार और नियमन को लेकर जागरूकता बढ़ाई है। नगर निगम की यह कार्रवाई शहरवासियों के लिए राहत का संदेश है और प्रशासन की तत्परता को दर्शाती है।

 

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