
लखनऊ : उर्दू सहाफत के बेहतरीन इंसान उर्दू और हिंदी सहाफत को एक प्लेटफार्म पर लाने का कारनामा करने वाले सैयद वकार मेहंदी रिजवी की सय्युम की मजलिस आज संपन्न हुई है सय्युम की मजलिस इमामबाड़ा मेहंदी कच्चा हाता अमीनाबाद में सम्पन्न हुई जिसको मौलाना शब्बर हुसैन रिजवी साहब ने खिताब किया।

मौलाना ने मजलिस में अपने बयान में कहा कि इंसान चला जाता है लेकिन उसको हमको बर्दाश्त करना आसान ना होता अगर कर्बला हमारे सामने ना होती कर्बला ने ही हमको सब्र करना सिखाया है उन्होंने कहा कि मरहूम वकार रिजवी के खानदान और अहले खाना के लोग मौजूद हैं जो गिरया कर रहे हैं लेकिन कर्बला में रोने पर भी पाबंदी थी और रोने पर तमाचे लगाए जाते थे। लेकिन कर्बला में सब्र का मुजाहिरा किया गया। और इसी कर्बला से हमें सब्र करने का दर्स भी मिलता है।