
लखनऊ : इमामबाड़ा मलका जहां जामा मस्जिद, तहसीनगंज से मस्जिद इमामिया हाता मिर्जा अली खां तक हजरत अली असगर (अ.स.) के झूले की जियारत करायी गयी। यहां मौलाना फरहत हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। जिस मजलिस को मौलाना फरहत हुसैन ने बयान करते हुए कहा कि कर्बला में सबसे छोटे मासूम अली असगर ने अपनी कुर्बानी देकर इमाम हुसैन की जीत का परचम लहराया।

दुश्मने इस्लाम ने इमाम हुसैन के 6 माह के बेटे अली असगर तीन दिन की भूख प्यास से तड़प रहे थे जब इमाम हुसैन उन्हें पानी पिलाने मैदाने जंग में ले गए तो उन्हें पानी की जगह जहर से बुझे तीर से हमला करके शहीद कर दिया गया। मजलिस के बाद शहर की अंजुमनों ने नौहाख्वानी व छुरी का मातम भी किया। कार्यक्रम का आयोजन अंजुमन नय्यारूल इस्लाम ने किया था।