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शिया हेल्पलाइन पर सवाल-जवाब, प्रश्न एक गर्भवती महिला के लिए रोज़े का क्या हुक्म है

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लखनऊ : कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी षीराज़ी से जारी हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रष्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने दिएमहिलाओं के लिए हेल्प लाइन षुरू की गयी है जिस मे महिलाओं केप्रष्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 638689712 षिया हेल्प लाइन में तमाम मराजए के मुकल्लदीन के दीनी मसायल जानने के लिए स्बह 10 -12 बजे तक 9415580936- 9839097407 इस नम्बर पर संपर्क करें। एवं ईमेलः उंमस786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।

प्रश्न-यदि कोई व्यक्ति कोरोना के डर से मस्जिद में रोज़ा अफतार करने से परहेज करता है, तो वह गुनाहगार होगा?

उत्तर-यदि कोरोना बीमारी फैलने का कोई खतरा नहीं है, तो मस्जिद में रोज़ा अफतार करना बेहतर है। प्रश्न-यदि किसी व्यक्ति को पत्थरी की वजह डॉक्टर द्वारा से बहुत पीने के का आदेश दिया जाता है, तो ऐसी हालत मे रोज़ा रखने का क्या हुक्म है? त्तर-इस्लाम में जो अहकाम है उनकी विशेषता यह है कि अल्लाह ने अपने हुक्म के बाद इंसानों की परेशानी को देखते हुए डॉक्टर के फैसलों को अनिवार्य कर दिया है। यानि मनुष्य रोज़ा नहीं रखेगा।

प्रश्न-यदि कोई व्यक्तिं पूरे एक महीने के रोज़े की नियत एक साथ करले तो तो क्या हुक्म है?

उत्तर-पूरे एक महीने की नियत एक साथ की जा सकती है।

प्रश्न-एक गर्भवती महिला के लिए रोज़े का क्या हुक्म है?

उत्तर-यदि कोई महिला गर्भवती है, तो उसे अपने और अपने पेट मे बच्चे की देखभाल करते हुए रोज़ा रखने या ना रखने का फैसला डॉक्टर के आदेश के अनुसार रोज़ा रखे।

प्रश्न-रोज़े की स्थिति में गस्बी पानी से वज़ू किया जा सकता है?

उत्तर-किसी भी परिस्थिति में गस्बी पानी से वज़ू सही नही है चाहे वह रोज़ा हो या ना हो।

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