
‘मोदी-शाह इस्तीफा दो!
इंडिया Live:संसद परिसर में मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया, जब विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और ‘मोदी–शाह इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर कर रही है, योजना के लिए पर्याप्त बजट आवंटित नहीं किया जा रहा और राज्यों को मिलने वाला बकाया फंड महीनों से रोका गया है, जिससे देशभर में करोड़ों ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर संसद परिसर पहुंचे, जिन पर “MGNREGA बचाओ”, “गरीबों का हक़ मत छीनो” जैसे नारे लिखे थे। विपक्षी नेताओं का कहना था कि मनरेगा सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा है, और सरकार की नीतियों के चलते कई राज्यों में काम लगभग ठप हो चुका है। मजदूरों को समय पर मज़दूरी नहीं मिल पा रही, जिससे गांवों में बेरोज़गारी और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा के बजट में लगातार कटौती कर रही है, जबकि ज़मीनी स्तर पर काम की मांग बढ़ रही है। नेताओं का कहना है कि यदि सरकार सच में गरीबों के हित में काम कर रही है, तो उसे तुरंत राज्यों का बकाया जारी करना चाहिए और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करानी चाहिए। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, सत्तापक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। सरकार का कहना है कि मनरेगा योजना पूरी पारदर्शिता के साथ चलाई जा रही है और फंड का आवंटन नियमों और प्रक्रिया के तहत किया जाता है। सरकार ने यह भी दावा किया कि मजदूरों को सीधे उनके खातों में भुगतान किया जा रहा है और विपक्ष बिना तथ्यों के भ्रम फैलाने का काम कर रहा है।
इस पूरे हंगामे के बीच संसद के कामकाज पर भी असर पड़ा है और आने वाले दिनों में मनरेगा को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने के संकेत मिल रहे हैं। सवाल यही है कि क्या सरकार विपक्ष की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी या फिर मनरेगा का मुद्दा संसद के भीतर और बाहर सियासी संघर्ष का बड़ा केंद्र बना रहेगा।