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मनरेगा पर मोदी सरकार घिरी;नीतीश-नायडू का खुला हमला!

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मनरेगा पर मोदी सरकार घिरी;नीतीश-नायडू का खुला हमला!

इंडिया Live: मनरेगा को लेकर मोदी सरकार इस समय सियासी तौर पर मुश्किल में नजर आ रही है। वजह है एनडीए के ही दो बड़े सहयोगी नेता—बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू—जिन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों नेताओं का कहना है कि मनरेगा गरीबों और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए जीवन रेखा है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों और फंड कटौती से यह योजना कमजोर होती जा रही है।

 

 

 

 

ऐसे समय में जब महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है, तब मनरेगा को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि बिहार जैसे राज्य में मनरेगा सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों की जरूरत है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार समय पर पैसे नहीं भेज रही, जिससे मजदूरों को महीनों तक मजदूरी का इंतजार करना पड़ता है। कई जगहों पर काम बंद हो गए हैं और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। नीतीश कुमार का यह भी कहना है कि अगर केंद्र सरकार सहयोग नहीं करेगी तो राज्यों के लिए इस योजना को चलाना मुश्किल हो जाएगा।

वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी मनरेगा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में मनरेगा से गरीबों को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और गांवों को बुनियादी सुविधाएं मिली हैं। लेकिन फंड की कमी और सख्त नियमों के कारण राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। नायडू का कहना है कि केंद्र को राजनीति से ऊपर उठकर इस योजना को मजबूत करना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ता है।

दरअसल, मोदी सरकार पर आरोप है कि पिछले कुछ सालों में मनरेगा के बजट में बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि काम की मांग लगातार बढ़ रही है। विपक्षी दल पहले से ही इस मुद्दे को उठा रहे थे, लेकिन अब एनडीए के भीतर से ही आवाज उठने से सरकार की परेशानी बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि 2024 के बाद बने राजनीतिक हालात में सहयोगी दलों का दबाव पहले से ज्यादा अहम हो गया है और सरकार हर मुद्दे पर उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती।
केंद्र सरकार की ओर से यह सफाई दी जा रही है कि मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए नियम सख्त किए गए हैं और फर्जीवाड़ा रोकना जरूरी है। सरकार का दावा है कि जहां-जहां सही तरीके से काम हो रहा है, वहां फंड की कोई कमी नहीं है। लेकिन राज्य सरकारों का कहना है कि जमीनी हकीकत इससे अलग है और तकनीकी नियमों के कारण गरीब मजदूर सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
कुल मिलाकर मनरेगा अब सिर्फ एक रोजगार योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह मोदी सरकार और उसके सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक तनाव का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू का खुलकर सामने आना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में केंद्र पर मनरेगा को लेकर दबाव और बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार अपने सहयोगियों की मांग मानकर फंड और नियमों में बदलाव करती है या यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा सियासी विवाद बन जाता है

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