
स्कूल मर्जर नीति के खिलाफ सांसद प्रिया सरोज ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, कहा—आरटीई की भावना के खिलाफ है यूपी सरकार का कदम
स्कूल मर्जर नीति के खिलाफ सांसद प्रिया सरोज ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, कहा—आरटीई की भावना के खिलाफ है यूपी सरकार का कदम
लखनऊ/नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी की मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज ने उत्तर प्रदेश में विद्यालयों के एकीकरण (स्कूल मर्जर) की नीति को शिक्षा विरोधी करार देते हुए इसके खिलाफ केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखकर इस नीति की समीक्षा कर तत्काल मर्जर प्रक्रिया को रद्द करने की अपील की है।अपने पत्र में सांसद प्रिया सरोज ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 50 या उससे कम नामांकित छात्रों वाले विद्यालयों को एकीकृत करने की जो नीति अपनाई जा रही है, वह न केवल सामाजिक रूप से संवेदनहीन है, बल्कि यह भारत सरकार द्वारा लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) की मूल भावना के भी प्रतिकूल है। उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम के अनुसार 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को उसके घर से अधिकतम एक किलोमीटर के भीतर स्थित प्राथमिक विद्यालय में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।लेकिन यूपी सरकार की वर्तमान मर्जर नीति के कारण ऐसे अनेक विद्यालय जो बच्चों के निवास क्षेत्र के पास स्थित थे, या तो बंद कर दिए गए हैं या उन्हें दूर के किसी अन्य विद्यालय में मिला दिया गया है। इससे छोटे बच्चों को अधिक दूरी तय कर स्कूल जाना पड़ रहा है, जो ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए विशेष रूप से मुश्किल हो गया है। सांसद ने कहा कि इसका सीधा परिणाम यह है कि राज्य में बच्चों की ड्रॉपआउट दर में तेजी से वृद्धि हो रही है।प्रिया सरोज ने इस नीति को न केवल बच्चों के शिक्षा अधिकारों के विरुद्ध बताया, बल्कि शिक्षकों और विद्यालय कर्मियों की आजीविका के लिए भी एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में तकरीबन 2.5 लाख शिक्षक और स्कूल स्टाफ इस मर्जर नीति के कारण अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को और अधिक कमजोर कर रहा है।सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह राज्य सरकार को निर्देशित करे कि विद्यालयों के एकीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और इस नीति की समग्र समीक्षा की जाए ताकि बच्चों के शिक्षा अधिकारों की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है, और जब किसी नीति के चलते बच्चे विद्यालय छोड़ने को मजबूर हो
जाएं, तो वह नीति पुनर्विचार की मांग करती है।
