
मस्जिदों में लाउडस्पीकर हटाए जाने की जिद में जेल भेजे जा रहे हैं मुसलमान
यू पी Live: उत्तर प्रदेश में मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकर के खिलाफ मुहिम चलाकर इसे उतारा जा रहा है. तयशुदा मानक से ज्यादा आवाज़ होने के इल्ज़ाम में मज्सिदों से लाउड स्पीकर जब्त किये जा रहे हैं. जो लोग सरकार के इन आदेशों की खिलाफ वर्जी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है. मंगलवार को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में थाना टाण्डा के मानकपुर बंजारिया गांव की मस्जिद में लाउडस्पीकर से रोज़ा खोलने के एलान के बाद विवाद हो गया. हिन्दू पक्ष की शिकायत के बाद पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

उत्तर प्रदेश में रमजान शुरू होने से पहले ही स्थानीय पुलिस- प्रशासन ने मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकर को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है. कई जगह से लाउड स्पीकर उतार कर ज़ब्त क्र लिया गया है. संभल में, बांदा, बरेली, बिजनोर जैसे कई जिलों में लाउड स्पीकर ज़ब्त होने के बाद बिना माइक के अज़ान दी जा रही है. सोमवार को कई जिलों में मस्जिद इंतजामिया ने पुलिस से रमजान में लाउड स्पीकर पर अज़ान और सेहरी में ऐलान करने की परमिशन मांगी थी, लेकिन उसे निरस्त कर दिया गया है.
रामपुर के अपर पुलिस अधीक्षक अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस को डायल 112 पर शिकायत मिली थी कि थाना टांडा इलाके के मानकपुर बंजारिया गाँव मे लाउडस्पीकर से रोज़ा खोलने का एलान किया जा रहा है. शिकायत में कही गयी थी कि नमाज स्थल पर ध्वनि मानकों का उल्लंघन किया जा रहा था, जिससे कुछ स्थानीय लोगों को ऐतराज था. सूचना मिलते ही थाना टांडा पुलिस मौके पर पहुंची और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इन सभी पर शान्ति भंग करने का इल्ज़ाम लगाया गया है. पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है. उत्तर प्रदेश के बाद भाजपा शासित दूसरे राज्यों में भी मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकर और उसपर होने वाली अज़ान पर रोक लगाने की मांग उठ रही है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच ने रमजान में मस्जिदों पर लाउड स्पीकर प्रतिभा की मांग की है.
ऐसे मांगों के बाद उलेमा ने भी कहा है कि मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकर को अगर प्रशासन हटाने को बोल रहा है, तो उसका पालन किया जाए. मुसलमान लाउड स्पीकर पर अज़ान की जिद न करें. इसका हमारे रमजान और नमाज़ से कोई लेना- देना नहीं है. हर घर में घड़ी और मोबाइल है. लोग उसके हिसाब से नमाज़, अफ्तार और सेहरी का एहतमाम करते हैं
और कर लेंगे. जहाँ भी हिन्दू- मुस्लिम या मुसलमानों के अलावा दूसरे मजहब के लोग रहते हैं, उनकी सुविधाओं का सम्मान किया जाना चाहिए. सेहरी के वक़्त बार- बार ऐलान से उन्हें दिक्कत हो सकती है. कुछ मस्जिदों में फज्र की नमाज़ के बाद लाउड स्पीकर पर नात बजाने का भी चलन है, ऐसे मस्जिदों के इंतजामिया को सख्ती से इसे बंद करना चाहिए.