
Nazia Elahi Khan ने इंडिगो के बारे में किया हैरान कर देने वाला दावा!
इंडिया Live: हाल ही में सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर एक विवाद तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें पत्रकार और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली नाज़िया इलाही ख़ान ने IndiGo एयरलाइंस के स्टाफ पर कथित बदसलूकी का आरोप लगाया है। नाज़िया का दावा है कि फ्लाइट के दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिसे वह अपमानजनक और असंवेदनशील बता रही हैं। इस घटना के सामने आने के बाद मामला केवल एक एयरलाइन शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीति, विचारधाराओं और सोशल मीडिया ध्रुवीकरण को भी अपने दायरे में खींच लिया।
नाज़िया इलाही ख़ान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि फ्लाइट में उनके साथ जो व्यवहार हुआ, वह केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि एक बड़े सिस्टमेटिक रवैये को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने अपने अधिकारों की बात की, तो स्टाफ का रवैया और कठोर हो गया। नाज़िया के अनुसार, यह घटना यात्रियों की गरिमा और सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
IndiGo एयरलाइंस की ओर से इस मामले पर एक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई, जिसमें कंपनी ने कहा कि वह इस घटना की आंतरिक जाँच कर रही है और यात्रियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके स्टाफ को यात्रियों से शालीन व्यवहार के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस बयान के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ।
इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ़्ती ने नाज़िया इलाही ख़ान के समर्थन में एक टिप्पणी की। इल्तिजा मुफ़्ती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर कोई महिला सार्वजनिक रूप से अपने साथ हुई कथित बदसलूकी की बात उठा रही है, तो उसे गंभीरता से सुना जाना चाहिए, न कि ट्रोल किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे महिलाओं की आवाज़ और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।
इल्तिजा मुफ़्ती के इस कमेंट के बाद, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने उनके समर्थन को सही ठहराया, तो वहीं कई यूज़र्स ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया। इसी बिंदु पर नाज़िया इलाही ख़ान की प्रतिक्रिया और तेज़ हो गई। नाज़िया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका मुद्दा राजनीति नहीं है, बल्कि एक नागरिक और एक महिला के रूप में सम्मान का है, और इसे किसी भी तरह से राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है।
नाज़िया की नाराज़गी इसलिए भी बढ़ी क्योंकि सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। कुछ यूज़र्स ने उनकी मंशा पर सवाल उठाए, तो कुछ ने उनकी पहचान और विचारधाराओं को निशाना बनाया। नाज़िया ने इसे “victim blaming” करार दिया और कहा कि भारत में आज भी जब कोई महिला अपनी बात रखती है, तो उसे शक और नफरत की नज़र से देखा जाता है।
इस पूरे विवाद में एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या सार्वजनिक हस्तियों के समर्थन से किसी मुद्दे की गंभीरता बढ़ती है या फिर वह अनावश्यक राजनीतिक बहस में बदल जाता है। इल्तिजा मुफ़्ती के कमेंट के बाद नाज़िया का भड़कना इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जहाँ नाज़िया बार-बार यह दोहराती दिखीं कि वह किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक फ्लाइट अनुभव का नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया के उस माहौल को भी दर्शाता है, जहाँ हर मुद्दा तुरंत ध्रुवीकरण का शिकार हो जाता है। नाज़िया इलाही ख़ान का गुस्सा केवल IndiGo स्टाफ तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि वह उस सिस्टम पर सवाल उठा रही हैं, जहाँ महिला शिकायतों को अक्सर संदेह की नज़र से देखा जाता है।
फिलहाल, IndiGo की आंतरिक जाँच का इंतज़ार किया जा रहा है, वहीं नाज़िया इलाही ख़ान अपने आरोपों पर कायम हैं। दूसरी ओर, इल्तिजा मुफ़्ती के कमेंट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक समर्थन किस तरह किसी व्यक्तिगत अनुभव को राष्ट्रीय बहस में बदल सकता है। सवाल यह है कि क्या इस बहस का नतीजा यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करेगा या फिर यह मामला भी कुछ दिनों में सोशल मीडिया की भीड़ में खो जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यात्री सम्मान, महिला सुरक्षा, और सोशल मीडिया ट्रोलिंग जैसे मुद्दों पर समाज और संस्थानों की जिम्मेदारी क्या है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलते हैं और क्या इस विवाद से कोई ठोस बदलाव सामने आता है।