diwali horizontal

इजरायल से सऊदी तक तबाही ही तबाही?

0 12

इजरायल से सऊदी तक तबाही ही तबाही?

IRAN-US WAR: इस समय पूरी दुनिया की नज़र मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है, जहाँ हालात दिन-ब-दिन और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अमेरिका, इजरायल, ईरान और सऊदी अरब जैसे बड़े देश एक ऐसे टकराव के बीच खड़े हैं, जो अगर और बढ़ा तो पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। खबरों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई अहम ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए हैं, जिनमें सैन्य ठिकाने, हथियार डिपो और रणनीतिक जगहें शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इन हमलों से ईरान को काफी नुकसान हुआ है, लेकिन कहानी सिर्फ एक तरफ की नहीं है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है और उसने अमेरिका के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, खासकर सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर हमले की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा कतर के पास तेल टैंकर पर हमले की बात भी सामने आई है, जिससे साफ हो गया है कि अब ये टकराव सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहा बल्कि समुद्री रास्तों पर भी खतरा बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़, जो दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है, वहां हालात बेहद नाजुक हो चुके

अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुक सकती है और पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यह जंग ज्यादा लंबी नहीं चलेगी और शायद कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकती है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस लड़ाई से धीरे-धीरे पीछे हट सकता है और बाकी देशों को खुद अपने हितों की रक्षा करनी होगी। ट्रंप के इस बयान ने पूरी दुनिया में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो पावर बैलेंस पूरी तरह बदल सकता है और मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स यह भी कहती हैं कि सऊदी अरब और यूएई जैसे देश चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहे,


जिससे यह टकराव और बड़ा रूप ले सकता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक सीमित युद्ध है या फिर यह धीरे-धीरे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अभी भी कमजोर नहीं हुआ है और उसके पास जवाब देने की पूरी क्षमता मौजूद है, जिससे आने वाले दिनों में और हमले देखने को मिल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। दूसरी तरफ ट्रंप का यह कहना कि बिना किसी समझौते के भी युद्ध खत्म हो सकता है, यह दिखाता है कि अमेरिका इस लड़ाई से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इतना आसान होगा।

क्योंकि इतिहास गवाह है कि मिडिल ईस्ट में शुरू हुए संघर्ष जल्दी खत्म नहीं होते और अक्सर लंबे समय तक चलते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक डर भी पैदा कर दिया है कि कहीं यह टकराव एक बड़े वैश्विक संकट में न बदल जाए, क्योंकि अगर ज्यादा देश इसमें शामिल हो गए तो हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है और हर दिन नई खबरें सामने आ रही हैं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आने वाला समय बहुत अहम होने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या कूटनीति इस संकट को शांत कर पाएगी या फिर दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.