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वक्फ संपत्ति पर कब्जा या कानून?

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वक्फ संपत्ति पर कब्जा या कानून?

Bihar Waqf Amendment Bill: बिहार में वक्फ संशोधन बिल को लेकर इन दिनों सियासी और सामाजिक माहौल काफी गरम है। वक्फ अधिनियम 2025 को लेकर विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने खुलकर विरोध जताया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस बिल को “सम्विधान के खिलाफ” बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह बिल मुस्लिम

समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप का जरिया है। इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि आरजेडी “नमाजवादी” हो गई है, समाजवादी नहीं रही।

पटना में इमारत-ए-शरिया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बैनर तले एक बड़ी रैली भी हुई जिसमें कांग्रेस, आरजेडी, एआईएमआईएम, सपा, सीपीआई जैसे दलों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। रैली में “वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ” जैसे नारे लगाए गए और इसे मुसलमानों के खिलाफ साजिश करार दिया गया।

इस बीच भाजपा ने मुस्लिम समुदाय के पसमंदा वर्ग को साधने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पार्टी के प्रदेश नेताओं का कहना है कि यह बिल भ्रष्टाचार रोकने और वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इससे पहले इन संपत्तियों में अनियमितता और निजी हितों के आरोप लगते रहे हैं।

इस विवाद ने न्यायपालिका का भी ध्यान खींचा है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी और कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक मामला लंबित है, तब तक वक्फ संपत्तियों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

ग्रामीण इलाकों और कस्बों में भी इसका असर देखा जा रहा है। जैसे बेगूसराय में मुसलमानों ने मस्जिदों में काली पट्टी बांधकर इबादत की और विरोध दर्ज किया। वहीं कुछ स्थानों पर शांति बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन को सतर्क रहना पड़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। दोनों पक्ष – सत्ता और विपक्ष – इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने में लगे हुए हैं। वक्फ अधिनियम को लेकर चल रहा यह विवाद फिलहाल थमने के आसार नहीं दिखा रहा, और सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला ही अब तय करेगा कि यह कानून आगे कैसे लागू होगा या नहीं होगा।

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