diwali horizontal

ईरान-अमेरिका तनाव पर भड़का सियासी संग्राम!

0 31

IRAN-US Tension/ईरान-अमेरिका तनाव पर भड़का सियासी संग्राम!

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज़ हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि तेहरान के पास परमाणु समझौते पर सहमत होने के लिए लगभग 10 से 15 दिन का समय है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक “सार्थक और मजबूत” समझौता चाहता है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि अगर तय समय में समझौता नहीं हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका किसी भी तरह का कमजोर या आधा-अधूरा समझौता स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान को यह तय करना होगा कि वह शांति और बातचीत का रास्ता चुनता है या फिर टकराव का। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन वह अभी भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। खबरों के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत, विमानवाहक पोत और आधुनिक वायु-रक्षा प्रणालियां खाड़ी क्षेत्र के पास तैनात की गई हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इस तैनाती को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सैन्य गतिविधियों में से एक माना जा रहा है।
ईरान की ओर से अब तक ट्रम्प के अल्टीमेटम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, ईरान पहले कई बार कह चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी नेताओं का कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हैं और उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। साथ ही, ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह दबाव या धमकी के तहत कोई समझौता नहीं करेगा।

 


अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर कई सालों से विवाद चलता आ रहा है। पहले भी दोनों देशों के बीच समझौते और फिर तनाव की स्थिति बन चुकी है। इस बार हालात इसलिए ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं क्योंकि सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हुई हैं। अगर बातचीत विफल होती है, तो क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
मध्य पूर्व पहले से ही कई संघर्षों का केंद्र रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव होता है, तो इसका असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। खाड़ी देशों में चिंता का माहौल है, क्योंकि किसी भी सैन्य कार्रवाई से हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।
इस तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो सकता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र दुनिया के बड़े तेल उत्पादक इलाकों में से एक है। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार इस समय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

 


अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। कई देशों का मानना है कि कूटनीति ही इस समस्या का सही समाधान है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने भी बातचीत के जरिए हल निकालने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक शांति के लिए खतरा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले 10 से 15 दिन बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। अगर इस दौरान कोई सकारात्मक संकेत मिलता है, तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन अगर बातचीत में प्रगति नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। दोनों देशों के फैसले पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।

फिलहाल माहौल अनिश्चितता से भरा हुआ है। एक ओर अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है, तो दूसरी ओर ईरान दबाव में झुकने को तैयार नहीं दिख रहा। ऐसे में सवाल यह है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या फिर यह तनाव किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा। आने वाले दिन इस पूरे संकट की दिशा तय करेंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.