diwali horizontal

सियासी जंग: Owaisi vs Rana, मोदी को लेकर जुबानी भिड़ंत!

0 60

सियासी जंग: Owaisi vs Rana, मोदी को लेकर जुबानी भिड़ंत!

इंडिया Live:देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किए गए तीखे हमले के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ओवैसी के बयान पर भाजपा सांसद नवनीत राणा ने पलटवार करते हुए न सिर्फ ओवैसी की राजनीति पर सवाल उठाए, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को लेकर भी बड़ा दावा किया। दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग अब राष्ट्रीय राजनीति का नया मुद्दा बनती जा रही है।

दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों को निशाने पर लिया। ओवैसी ने कहा कि मोदी सरकार पिछले कई वर्षों से सत्ता में है, लेकिन देश के गरीब, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की हालत में कोई बुनियादी सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही है। ओवैसी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना गुनाह नहीं है, लेकिन मौजूदा सरकार आलोचना को दबाने की कोशिश करती है।

ओवैसी के इस बयान के सामने आते ही भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने ओवैसी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। नवनीत राणा ने कहा कि ओवैसी की राजनीति सिर्फ और सिर्फ तुष्टिकरण पर आधारित रही है और उन्होंने हमेशा समाज को बांटने का काम किया है। राणा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक, सैन्य और वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई है।

नवनीत राणा ने पलटवार करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यह प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही नतीजा है। उन्होंने कहा कि चाहे बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की हो या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की साख की—हर मोर्चे पर मोदी सरकार ने मज़बूत नेतृत्व दिया है। राणा ने ओवैसी के बयान को “राजनीतिक हताशा” करार देते हुए कहा कि चुनावों में बार-बार हार के बाद ऐसे बयान देना उनकी मजबूरी बन गई है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश की राजनीति में वैचारिक विभाजन को उजागर कर दिया है। एक तरफ ओवैसी जैसे नेता हैं, जो सरकार पर अल्पसंख्यकों के मुद्दे को लेकर हमलावर रहते हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा और उसके नेता हैं, जो मोदी सरकार के कामकाज को ऐतिहासिक बताते हुए विपक्ष पर तुष्टिकरण और नकारात्मक राजनीति का आरोप लगाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ दो नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी राजनीतिक बहस का हिस्सा है जो आने वाले चुनावों से पहले और तेज़ होने वाली है।

ओवैसी लंबे समय से मोदी सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है। वहीं भाजपा का आरोप है कि ओवैसी जैसे नेता समाज में डर का माहौल बनाकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करते हैं। नवनीत राणा ने भी इसी लाइन पर हमला बोलते हुए कहा कि देश अब इस तरह की राजनीति को समझ चुका है और जनता विकास, सुरक्षा और स्थिरता के साथ खड़ी है।

इस बयानबाज़ी का असर सोशल मीडिया पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #OwaisiVsRana और #PMModi ट्रेंड करने लगे हैं। समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्षों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग ओवैसी के सवालों को लोकतंत्र के लिए ज़रूरी बता रहे हैं, तो वहीं कई लोग नवनीत राणा के जवाब को राष्ट्रहित से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के बयान चुनावी मौसम में और तेज़ हो जाते हैं। हर नेता अपने कोर वोट बैंक को मज़बूत करने की कोशिश करता है। ओवैसी जहां अल्पसंख्यक मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार को घेरते हैं, वहीं भाजपा नेता राष्ट्रवाद और विकास के एजेंडे को आगे रखते हैं। नवनीत राणा का पलटवार भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.