
फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर किया डिजिटल हाउस अरेस्ट, 1 करोड़ 18 लाख की साइबर ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार
फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर किया डिजिटल हाउस अरेस्ट, 1 करोड़ 18 लाख की साइबर ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ: राजधानी लखनऊ की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जो खुद को सीबीआई और ईडी अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल रूप से बंधक बनाकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था। आरोपी ने हाल ही में एक व्यक्ति से इसी तरीके से 1 करोड़ 18 लाख 55 हजार रुपये की धोखाधड़ी की थी।यह पूरा मामला 22 सितंबर 2025 का है, जब लखनऊ निवासी हीरक भट्टाचार्य को एक व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी विजय खन्ना बताया और कहा कि उनके नाम से केनरा बैंक, दिल्ली में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसमें धोखाधड़ी का पैसा जमा किया जा रहा है। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी राहुल गुप्ता बताते हुए जांच के नाम पर लगातार व्हाट्सएप कॉल और चैट के माध्यम से हीरक भट्टाचार्य से संपर्क बनाए रखा। इन ठगों ने उन्हें डराकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा करवा ली।पीड़ित को फर्जी गिरफ्तारी वारंट और न्यायालय के सीज़र आदेश भेजे गए तथा यह कहा गया कि जांच गोपनीय है और इस दौरान किसी से भी संपर्क नहीं करना है। लगातार दबाव और धमकियों के चलते पीड़ित ने निर्दिष्ट खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। जब बाद में उसे ठगी का अहसास हुआ, तो उसने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस पर पुलिस ने मुकदमा संख्या 148/2025 धारा 318(4)/319(2) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66(D) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।पुलिस आयुक्त लखनऊ के आदेश और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) के निर्देशन में, पुलिस उपायुक्त (अपराध) के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश कुमार यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी जांच और ट्रांजैक्शन ट्रेसिंग के जरिए आरोपी कमलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह पहले मिठाई बनाने और सप्लाई करने का काम करता था। कुछ माह पहले उसकी मुलाकात सीतापुर निवासी अनुराग नामक व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे बताया कि अगर वह अपने नाम से बैंक खाता खुलवाकर उससे जुड़ा सिम कार्ड देगा, तो उसे खाते में हुए ट्रांजैक्शन का दो प्रतिशत कमीशन मिलेगा। लालच में आकर कमलेश ने गोमतीनगर, पत्रकारपुरम स्थित इंडसइंड बैंक में खाता खुलवाया और उससे संबंधित सभी दस्तावेज अनुराग को सौंप दिए।अनुराग विदेश में बैठे साइबर ठगों से जुड़ा हुआ था और इन ट्रांजैक्शनों के बदले पांच प्रतिशत कमीशन यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) के रूप में प्राप्त करता था। जांच में यह भी पता चला कि कमलेश के खाते में देशभर से करोड़ों रुपये ठगी के जरिए आए हैं और एनसीसीआरपी पोर्टल पर इस खाते से जुड़ी 22 शिकायतें दर्ज हैं।साइबर अपराधियों के गिरोह का तरीका बेहद संगठित है। वे कोरियर पैकेटों से प्राप्त सिम कार्ड, आधार कार्ड, इंक सिग्नेचर आदि का दुरुपयोग करते हैं। खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं कि उन्होंने किसी गंभीर अपराध में संलिप्तता दिखाई है। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल या स्काइप जैसी माध्यमों पर निगरानी में रखकर “डिजिटल हाउस अरेस्ट” किया जाता है और फर्जी जांच के नाम पर रकम वसूली जाती है। कई मामलों में वे फर्जी पुलिस स्टेशन या कोर्टरूम जैसी पृष्ठभूमि दिखाकर पीड़ितों को डराते हैं और उनसे बड़ी रकम ठग लेते हैं।पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन (रीयलमी) बरामद किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान कमलेश कुमार पुत्र शिवबालक, निवासी ग्राम सैफलपुर ढैढैमाऊ, थाना काकोरी, मलिहाबाद, लखनऊ के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 39 वर्ष है।गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव, उपनिरीक्षक प्रशांत रघुवंशी, मुख्य आरक्षी विवेक कुमार यादव, आरक्षी संजय कुमार गुप्ता और आरक्षी वैभव नैन शामिल रहे।साइबर क्राइम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉल या संदेश पर यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट या पूछताछ की बात करे, तो उससे भयभीत न हों। भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसी किसी घटना में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
