diwali horizontal

अपनी नागरिकता साबित करो!!

0 70

अपनी नागरिकता साबित करो!!

नागरिकता साबित करो :   ये एक ऐसा मुद्दा बनता जा रहा है जो अब धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में चिंता का कारण बन रहा है।

 

खासकर बिहार जैसे राज्यों में लोग अब ये सोचने लगे हैं कि अगर NRC आया, तो क्या हम अपने देश के नागरिक साबित कर पाएंगे या नहीं?
NRC यानी National Register of Citizens का मतलब है नागरिकों की एक लिस्ट बनाना, जिसमें यह तय किया जाएगा कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। असम में पहले ही NRC लागू हो चुका है,

और वहां लाखों लोगों को नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज़ दिखाने पड़े थे। अब यही डर बिहार के लोगों के बीच भी फैल रहा है।
गांव से लेकर शहर तक लोग परेशान हैं—कहीं कोई अपने पुराने दस्तावेज़ ढूंढ रहा है, तो कोई आधार कार्ड और राशन कार्ड को ही सबकुछ मान रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन से कागज़ ज़रूरी होंगे अगर NRC लागू होता है?
अगर NRC आता है, तो जिन दस्तावेज़ों की ज़रूरत हो सकती है, उनमें शामिल हैं:
जन्म प्रमाण पत्र

दस साल या उससे पुराने स्कूल के कागज़
पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी
ज़मीन या मकान से जुड़े पुराने दस्तावेज़
राशन कार्ड (पुराना और नया)
माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज़
लोगों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि NRC का मकसद सिर्फ दस्तावेज़ों के आधार पर नागरिकता तय करना होता है। इसलिए अगर आपके पास सही कागज़ नहीं हैं, तो परेशानी हो सकती है। खासकर उन लोगों के लिए जो गरीब हैं, जो दूर-दराज़ के गांवों में रहते हैं, या जो कभी स्कूल नहीं गए।
बिहार में हाल के दिनों में कुछ जगहों पर लोगों को अफवाहों के जरिए डराया भी गया है—कहा गया है कि अगर तुम्हारे पास ये या वो कागज़ नहीं है, तो तुम्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। सरकार ने अभी तक साफ तौर पर यह नहीं कहा है कि NRC बिहार में लागू होगा ही।
लेकिन फिर भी आम जनता को सतर्क रहने की ज़रूरत है। सबसे पहले तो अपने पुराने दस्तावेज़ों को संभालकर रखें। जो दस्तावेज़ नहीं हैं, उन्हें बनवाने की कोशिश करें। पंचायत या नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र निकलवाएं। स्कूलों से अपने बच्चों के नाम के साथ-साथ माता-पिता के नाम सही करवाएं।
गांव के मुखिया, वार्ड मेंबर और पंचायत कर्मियों को भी इस बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए। लोकल स्तर पर कैम्प लगाए जा सकते हैं, ताकि लोग अपने दस्तावेज़ तैयार कर सकें। सोशल मीडिया पर चल रही झूठी बातों से बचें, और कोई भी खबर या सूचना सिर्फ सरकारी या भरोसेमंद सोर्स से ही लें।
नागरिकता साबित करो” अब सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक चिंता बन चुका है। इसलिए हमें समझदारी से काम लेना होगा—ना डरें, ना अफवाह फैलाएं, बस सतर्क रहें और ज़रूरी दस्तावेज़ संभालकर रखें।
प्रक्रिया पर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, यानी यह प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी। लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि सिर्फ कुछ सीमित दस्तावेज़ों के आधार पर नागरिकता या वोटर की पहचान तय करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे सामान्य और आम तौर पर उपलब्ध दस्तावेज़ों को भी पहचान के वैध प्रमाण के रूप में माने। कोर्ट ने यह चिंता भी जताई कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की प्रक्रिया शुरू करना संदेह पैदा करता है और यह निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह भी याद दिलाया कि नागरिकता का फैसला करना उसका काम नहीं है, यह गृह मंत्रालय की ज़िम्मेदारी है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से जवाब माँगा है और अगली सुनवाई 28 जुलाई को रखी गई है। इस बीच जनता को यह सलाह दी गई है कि वे अपने सभी जरूरी दस्तावेज़ संभालकर रखें और अगर कोई नोटिस आए, तो समय रहते जवाब दें। अफवाहों से बचें और सिर्फ सरकारी सूचना पर भरोसा करें।

Leave A Reply

Your email address will not be published.