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वन निगम के खाते से 64.82 करोड़ की हेराफेरी!

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वन निगम के खाते से 64.82 करोड़ की हेराफेरी!

उत्तर प्रदेश क्राइम LIVE: उत्तर प्रदेश में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जहां वन निगम (Forest Corporation) के खाते से 64.82 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में वन निगम के डायरेक्टर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और फर्जी खाते खोलकर निगम का पैसा ट्रांसफर कराया गया। इस पूरे मामले को लेकर राजधानी लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसके बाद प्रशासन और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, वन निगम के नाम से बैंक में जो खाते और एफडी दिखाई जा रही थीं, वे कागजों में तो मौजूद थीं, लेकिन असल में उनका संचालन संदिग्ध तरीके से किया जा रहा था। आरोप है कि बिना वन निगम के अधिकृत अधिकारियों की जानकारी और अनुमति के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एफडी बनाई गईं, फिर उन्हीं एफडी को आधार बनाकर अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी गई। धीरे-धीरे करके कुल 64.82 करोड़ रुपये निगम के खाते से बाहर निकाल लिए गए, और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
वन निगम के डायरेक्टर का कहना है कि जब आंतरिक ऑडिट और खाते की जांच की गई, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। कई एफडी ऐसी पाई गईं जिनका कोई रिकॉर्ड निगम के पास नहीं था, जबकि बैंक के दस्तावेजों में वे पूरी तरह वैध दिखाई जा रही थीं। डायरेक्टर ने साफ आरोप लगाया है कि यह सब बैंक की अंदरूनी मिलीभगत के बिना संभव नहीं था, क्योंकि खाता खोलने से लेकर एफडी बनाने और रकम ट्रांसफर करने तक हर स्तर पर बैंक कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है।

मामले के सामने आते ही वन निगम ने तुरंत लखनऊ में संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर में बैंक अधिकारियों, अज्ञात लोगों और संभावित बिचौलियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और बैंक से जुड़े सभी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और लेनदेन का ब्योरा खंगाला जा रहा है।
इस घोटाले को लेकर सरकार और प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि वन निगम एक सरकारी संस्था है और इसका पैसा जनता के संसाधनों से जुड़ा हुआ है। 64.82 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम की हेराफेरी ने यह चिंता बढ़ा दी है कि सरकारी संस्थानों के खातों की निगरानी और ऑडिट व्यवस्था कितनी मजबूत है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों।

फिलहाल पुलिस और आर्थिक अपराध से जुड़ी एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पैसा किन खातों में गया, किस-किस ने इसका फायदा उठाया और यह गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी। वन निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और कोशिश की जाएगी कि हेराफेरी की गई रकम को वापस सरकारी खजाने में लाया जाए। यह मामला न सिर्फ वन निगम के लिए, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आया है कि अगर समय रहते निगरानी न हो, तो सरकारी पैसों के साथ कितनी बड़ी धोखाधड़ी की जा सकती है।

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