
लखनऊ में 10 साल में इमारतों की सेफ्टी ऑडिट होगी
लखनऊ Live: शहर की सभी बहुमंजिला इमारतों की मजबूती अब कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। ट्रांसपोर्ट नगर में हाल ही में गिरी इमारत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। अब हर 10 साल में पुरानी बिल्डिंगों का सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होगा।

इसका खर्च खुद बिल्डिंग मालिक ही करेगा। वहीं, अगर कोई हादसा होता है, तो इसका जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक ही होगा नए बिल्डिंग बायलॉज लागू होने जा रहे हैं। इसके तहत अब शहर में पुरानी हो चुकी बहुमंजिला इमारतों का सेफ्टी ऑडिट होगा। लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में हुई घटना के बाद इसको बायलॉज में शामिल किया गया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसको लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के सभी प्राधिकरणों में लागू कर दिया जाएगा। ट्रांसपोर्टनगर में पिछले साल 8 सितंबर को हरमिलाप टावर भरभराकर जमींदोज हो गया था। हादसे में एक कारोबारी समेत आठ की मौत हो गई थी। मलबे में दबे 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस मामले के बाद शासन ने बिल्डिंग की जांच नेशनल फारेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी गुजरात की टीम से जांच करवाई थी। जिसमे घटिया निर्माण की बात सामने आई थी।
प्लाट के दायरे से तय होगी फीस LDA के अफसरों की माने तो सेफ्टी ऑडिट के लिए एक फीस तय नहीं है। इसके लिए बिल्डिंग मालिक को उसके प्लॉट की दायरे से हिसाब से फीस देनी होगी। अगर रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी आती है, तो उसको दूर करने के लिए भी समय दिया जाएगा। तय समय पर अगर उसको दूर नहीं किया गया, तो मालिक पर कार्रवाई की जाएगी। नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत शासन की कमेटी ने लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे थे। करीब 1100 लोगों ने अपने सुझाव उन्हें भेजे थे। जिसमें सबसे ज्यादा लोगों ने बहुमंजिला बिल्डिंग निर्माण के लिए सड़क की चौड़ाई 18 मीटर करने की मांग की है। हालांकि, इस पर समिति के लोग विचार कर रहे है।
सेफ्टी ऑडिट क्या है कोई बिल्डिंग की कितनी सुरक्षित है? क्या किसी खतरे की संभावना तो नहीं है? इन सभी सवालों के जवाब मिलते हैं सेफ्टी ऑडिट से। ऑडिट से सामने आता है कि किसी ऑफिस, फैक्ट्री या साइट पर सुरक्षा के नियमों का कितना पालन हो रहा है और क्या सुधार की जरूरत है।