
लखनऊ : विकास प्राधिकरण (एलडीए) में तत्कालीन अफसरों द्वारा किए गए कारनामे सामने आ रहे हैं। 56 संपत्तियों के फर्जीवाड़े के बाद अब एलडीए की ट्रांसपोर्ट नगर योजना में चार कमर्शियल प्लाट एलडीए द्वारा बिना बेचे बिक गए इन प्लाटों की कीमत बाजार में दस करोड़ रुपये तक है। मामला खुलते ही इससे एलडीए में फिर हड़कंप मच गया। बाबुओं और अफसरों की ढिलाई के कारण यह प्लाट मिलीभगत करके बेच डाले। ट्रांसपोर्ट नगर के फेस वन के ई ब्लाक व फेस टू में यह कारनामा हुआ है। इस मामले की शिकायत पर जब जांच हुई तो पूरी परतें खुल गई। एलडीए सचिव ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना के खाली भूखंडों का संपूर्ण ब्योरा मांगा है, वहीं एलडीए के प्लाट वापस लाने और दोषियों पर सख्त एक्शन लेने की बात कही है।
एलडीए को चूना लगाने वाले जालसाजों ने न सिर्फ कमर्शियल प्लाटों के कागजात फर्जी बनवाए, एक-एक करके उनकी गलत तरीके से रजिस्ट्री भी कर दी। शिकायत के आधार पर जब ट्रांसपोर्ट नगर योजना देख रहे बाबू से इसका ब्योरा मांगा गया तो हकीकत सामने आई। अब ट्रांसपोर्ट नगर योजना के संपूर्ण खाली प्लाटों का ब्योरा एलडीए एकत्रित कर रहा है। यह प्लाट डेढ़ हजार स्क्वायर फिट से लेकर चार हजार स्क्वायर फिट तक है। यह सभी कमर्शियल प्लाट हैं अब देखा जा रहा है कि यह कारनामा किस वर्ष हुआ है, जिससे दोषियों पर कार्रवाई हो सके।वही पूरा ब्योरा खाली प्लाटों का भी जल्द ही सचिव को मिलने की उम्मीद है, इसके बाद संबंधित कर्मियों व दोषियों के खिलाफ एलडीए एफआइआर भी करा सकता है।
नीलामी में दे जाते यह प्लाट बीस करोड़ तक
एलडीए अगर इन प्लाटों की नीलामी करता तो यह प्लाट दस से पंद्रह करोड़ तक मिल जाते। मिलीभगत करके यह प्लाट बेच दिए गए। अब एलडीए इन प्लाटों की रजिस्ट्री निरस्त करवाने के साथ ही इन पर अपना कब्जा लेने के लिए जल्द ही पैरवी करेगा। इसको लेकर एलडीए रूपरेखा बना रहा है।
क्या कहते हैं एलडीए सचिव
एलडीए सचिव पवन गंगवार के मुताबिक, शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया मामला सही है। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एलडीए अपने भूखंड वापस लेने के लिए कानूनी कार्रवाई करेगा। वहीं जो इस खेल में संलिप्त है उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।