diwali horizontal

मंच से आत्मनिर्भरता, पीछे से आयात की नीति”—अखिलेश यादव का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

0 53

मंच से आत्मनिर्भरता, पीछे से आयात की नीति”—अखिलेश यादव का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था आज एक गहरे विरोधाभास से जूझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे नारे तो मंच से दिए जा रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे देश को आयात-निर्भर बनाकर बड़ी विदेशी कंपनियों के हाथों गिरवी रखा जा रहा है।अखिलेश यादव ने कहा कि देश में आय की असमानता और विकास का असंतुलन इस कारण है कि मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन के क्षेत्र में लगातार गिरावट हो रही है। बड़े-बड़े कारोबारी घराने केवल ट्रेडिंग पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे देश का कच्चा माल, स्थानीय कौशल और पारंपरिक हुनर मूल्यहीन होता जा रहा है। इसके कारण रोजगार के अवसर भी तेजी से सिमटते जा रहे हैं।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता की सच्ची परिभाषा यही है कि भारत में ही उत्पादन हो, उद्योग-धंधे फले-फूलें और देश का श्रमिक, किसान व कारीगर समृद्ध हो। लेकिन आज की स्थिति यह है कि अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र बाहरी कंपनियों के उत्पादों और सेवाओं पर निर्भर होता जा रहा है। “सरकार सेलिंग एजेंट बनकर विदेशी कंपनियों को बढ़ावा दे रही है,” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा।उन्होंने आगे कहा कि “जब सरकार ही हाथी के दांत जैसी बन जाए—कुछ दिखाए, कुछ और करे—तो देश की असली समृद्धि कैसे आएगी?” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का ढोल पीटना तब तक निरर्थक है जब तक आम नागरिक की आय नहीं बढ़ती और सामाजिक असमानता कम नहीं होती।भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि गरीबी और अमीरी के बीच खाई लगातार चौड़ी हो रही है। “महंगाई थमती नहीं दिख रही है, किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहा, नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है, व्यापारी परेशान है—हर वर्ग अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहा है,” उन्होंने कहा।समाजवादी पार्टी प्रमुख ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियाँ पूरी तरह विफल हो चुकी हैं और इन्हीं विफलताओं ने समाज के हर तबके को प्रभावित किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही रुख जारी रहा तो न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था और कमजोर होगी, बल्कि सामाजिक असंतुलन और असुरक्षा की भावना भी बढ़ेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.