
बाराबंकी : चैधरी चरण सिंह ऐसे राजनेता थे जिनकी पूरी राजनीति किसानों पर केंद्रित रही। जीवन की आखिरी सांस तक वह किसानों को जगाते रहे। उनकी कोशिश थी कि भारत के समस्त किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। उनके दिल में किसानों के प्रति काफी हमदर्दी थी। यह बात गाँधी भवन में किसानों के प्रणेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह की 118वीं जयंती पर गाँधी जयंती समतोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कही। शर्मा ने कहा कि गांव, गरीब और किसान के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले चैधरी चरण सिंह खुद को प्रधानमंत्री से ज्यादा एक किसान व सामाजिक कार्यकर्ता मानते थे। किसानों के हित में उनकी कोशिशों की सदैव सराहना हुई। भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चरण सिंह की छवि ईमानदार और सादगी पसंद राजनेता की रही है। समाजसेवी जमील-उर-रहमान ने कहा कि चैधरी चरण सिंह का कहना था कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं खलिहानों से होकर गुजरता है।
वह भ्रष्टाचार को देश की तरक्की और खुशहाली का बाधक मानते थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गांव के गरीबों के लिए समर्पित कर दिया। इसीलिए देश के लोग मानते रहे हैं कि चैधरी चरण सिंह एक व्यक्ति नहीं, विचारधारा का नाम है। इस दौरान चै. चरण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। संगोष्ठी में वक्ताओं ने चै. चरण सिंह को याद किया। सभी वक्ताओं ने उनको किसानों का मसीहा बताया और कहा चै. चरण सिंह ने किसानों के हित में बडे कार्य किए जिससे वर्तमान सरकार को सीख लेने की आवश्यकता है। सभा का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से सत्यवान वर्मा, विनय कुमार सिंह, रंजय शर्मा, कलाधर यादव, मृत्युंजय शर्मा, अभिषेक तिवारी, चन्द्रिका यादव, लवकुश आनन्द, पी.के सिंह, साकेत मौर्य, अशोक जायवाल, नीरज दूबे सहित कई लोग मौजूद रहे।