
‘शाहरुख खान’ की बिहार चुनाव में एंट्री।
Shahrukh Khan Entry in Bihar:
बिहार की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है और हर राजनीतिक दल अपने-अपने तरीकों से वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश में लगा हुआ है। इस बीच एक अनोखा चर्चित विषय सोशल मीडिया और मीडिया हेडलाइंस में छा गया है—क्या बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान बिहार के मुस्लिम वोटरों को एनडीए के पक्ष में लाने में मदद करेंगे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि चुनाव के नजदीक आते ही मुस्लिम वोट बैंक का पलड़ा किसी भी गठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

शाहरुख खान, जिन्हें प्यार से ‘किंग खान’ कहा जाता है, भारतीय मुस्लिम समुदाय में बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी फिल्मों ने न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी करोड़ों दिलों को छुआ है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हो रही है कि क्या शाहरुख खान अपने प्रभाव के चलते बिहार के मुसलमानों को एनडीए की ओर मोड़ने में सहायक हो सकते हैं। हाल ही में कुछ वीडियो और खबरें वायरल हुईं, जिनमें कहा गया कि शाहरुख खान ने एनडीए के नेताओं से मुलाकात की है, और उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में किया जाएगा। हालांकि, शाहरुख खान की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम वोट बैंक बिहार में बेहद निर्णायक भूमिका निभाता है। पिछले कई चुनावों में इस समुदाय का झुकाव महागठबंधन की तरफ अधिक देखा गया है। लेकिन बीजेपी और JDU के नेतृत्व वाले NDA भी मुस्लिम वोटरों को आकर्षित करने के लिए कई कोशिशें कर रहे हैं। एनडीए की तरफ से विकास, कानून-व्यवस्था और केंद्र की योजनाओं को मुस्लिम आबादी तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में शाहरुख खान जैसे लोकप्रिय चेहरा अगर एनडीए के समर्थन में आते हैं, तो यह गठबंधन के लिए बड़ा फायदा हो सकता है।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस खबर को अफवाह करार दिया है और कहा है कि शाहरुख खान की छवि पूरी तरह अपोलिटिकल है। तेजस्वी यादव और आरजेडी के नेताओं का कहना है कि मुस्लिम समाज की राजनीति के मुद्दे फिल्मी सितारों से नहीं बल्कि उनके वास्तविक प्रतिनिधियों से तय होती है। उनका यह भी दावा है कि एनडीए की कोशिश मुस्लिम वोटों को बांटने और भ्रमित करने की साजिश है। विपक्ष ने शाहरुख खान को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों को ‘धोखा देने वाली रणनीति’ बताया है।
शाहरुख खान की फिल्मों और सोशल इमेज ने हमेशा सांप्रदायिक सौहार्द की बात की है। उन्होंने कई मौकों पर अपने बयान में सभी धर्मों और समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ाने पर जोर दिया है। ऐसे में अगर वह चुनावी मंच पर किसी राजनीतिक पार्टी के लिए प्रचार करते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जाएगा और बिहार में राजनीतिक हलचल बढ़ जाएगी।
मुस्लिम समुदाय के अंदर भी इस बात को लेकर मतभेद हैं। कुछ युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शाहरुख खान की अपील को सकारात्मक मानते हैं और कहते हैं कि एक लोकप्रिय कलाकार की भूमिका मतदाताओं को सोचने पर मजबूर कर सकती है। वहीं कुछ परंपरागत मतदाता मानते हैं कि राजनीति धर्म और जाति से ऊपर होनी चाहिए, और इसे फिल्मी सितारों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए।
इस चुनाव में शाहरुख खान की भूमिका चाहे कुछ भी हो, यह साफ है कि बिहार की राजनीति में हर आवाज़ मायने रखती है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही अपने-अपने तरीके से मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बिहार के मुस्लिम मतदाता भी बड़े सावधानी से चुनावी फैसले ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
अंततः, चाहे शाहरुख खान चुनावी प्रचार में सक्रिय हों या न हों, बिहार की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक की भूमिका निर्णायक रहेगी। यह देखना बाकी है कि आखिरकार ये वोट किसके पाले में जाते हैं और बिहार की सत्ता पर इसका क्या असर पड़ता है। चुनाव आने वाले महीनों में पूरी तरह से खुलासा होगा कि बिहार के मतदाता किसे मौका देते हैं और कौन अपनी उम्मीदों पर खरा उतरता है।