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शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़

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कल्बे सादिक की नमाज़ ए जनाज़ा में पहुंचे अलग-अलग धर्मों के लोग

पार्थिव शरीर को सुपुर्दे खाक करने के लिए चौक स्थित इमामबाड़ा गुफ़ारानमॉब ले जाया गया, बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें
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लखनऊ : शिया धर्म गुरू और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक का मंगलवार रात इंतकाल हो गया, उन्हें देश भर के नेताओं ने श्रद्घांजलि दी, बुधवार को लखनऊ के यूनिटी कॉलेज में नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ा गया, जिसमें बड़ी संख्या में अलग-अलग धर्मों के लोग शामिल हुए, महंत देव्यागिरी भी उन्हें श्रद्घांजलि देने के लिए पहुंचीं, मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्यागिरि ने कहा कि मनकामेश्वर बाबा से मौलाना कल्बे सादिक की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं, साथ ही उनके परिजनों, मित्रों और शिया समुदाय को इस गहरे सदमे को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना करते हैं, अयातुल्ला खामनेई के भारत में प्रतिनिधि आयतुल्लाह मेहंदी मेहंदवी ने नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ाई, इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को सुपुर्दे खाक करने के लिए लखनऊ चौक स्थित इमामबाड़ा गुफ़ारानमॉब ले जाया गया, उनकी अंतिम यात्रा में हज़ारो की संख्या में लोग मौजूद थे।

इस्‍लाम मज़हब लोगों से गले मिलने का पैगाम देता है किसी का गला काटने का नहीं : मौलाना कल्बे सादिक..

शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने हमेशा आपसी भाईचारे को ही तर्जी दी, खास मौके पर एक बार उन्होंने कहा था कि मज़हब के नाम पर कुछ लोग एक-दूसरे को लड़ाते हैं, जबकि ऐसी लड़ाई में धर्म कही नहीं होता है, ऐसी लड़ाई में सिर्फ पॉलिटिक्‍स होती है, ऐसे लोगों से संभल कर रहें लोग, आगे कहा था कि मुसलमान भाई न सिर्फ शिया-सुन्‍नी से मिले, बल्कि हिंदू और दूसरे धर्म के लोगों से भी मिले, अल्‍लाह ने जो जिस्म आपको दिया है उसको तरजीह दे, दुआ करते हुए सच के पीछे चले सत्‍ता की पीछे नहीं, इस्‍लाम मज़हब लोगों से गले मिलने का पैगाम देता है किसी का गला काटने का नहीं, जानकारी के अनुसार मौलाना कल्बे सादिक ने शिक्षा को लेकर बहुत से जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में रुचि लेते हुए उनकी जिम्मेदारी ली और जिन बच्चों की पढ़ाई को लेकर उनकी जरूरतें थी वो पूरी ज़िम्मेदारियां निभाई।

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