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स्मृति का मोदी पर फूटा गुस्सा।

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स्मृति का मोदी पर फूटा गुस्सा।

इंडिया Live:स्मृति ईरानी और नरेंद्र मोदी दोनों भारतीय जनता पार्टी के बड़े चेहरे माने जाते हैं। लेकिन अगर खबरें आ रही हैं कि स्मृति ईरानी मोदी पर भड़की हैं और उनका गुस्सा फूट पड़ा है, तो ये जरूर किसी बड़े अंदरूनी विवाद की ओर इशारा कर सकता है। यह मामला पार्टी के भीतर चल रहे तनाव और असहमति को दिखाता है, जो आम जनता की नजरों से अक्सर छिपा रहता है। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि स्मृति ईरानी पार्टी और सरकार में अपनी भूमिका को लेकर नाराज़ चल रही हैं। उन्हें लग रहा है कि उन्हें वह सम्मान और अधिकार नहीं मिल रहा है जिसके वह हकदार हैं।

कहा जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही उनका कद कम किया गया है और उन्हें सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। इससे पहले वह महिला एवं बाल विकास मंत्री थीं, लेकिन नई सरकार में उन्हें मंत्री पद से बाहर कर दिया गया। यह बदलाव उनके समर्थकों को भी चौंकाने वाला लगा। इसी नाराजगी के चलते स्मृति ईरानी ने कुछ करीबी लोगों से अपनी बात साझा की और कहा कि पार्टी में मेहनत करने वालों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े रहते हैं, उन्हें दरकिनार किया जा रहा है और सिर्फ कुछ खास लोगों को ही तवज्जो दी जा रही है।

इस बीच यह भी चर्चा है कि उन्होंने मोदी के फैसलों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए हैं। उनका यह कहना कि “सच बोलना अगर बगावत है, तो मैं बागी हूं” सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इससे यह साफ झलकता है कि उनके मन में गहरा आक्रोश है और शायद वे अब खुलकर अपनी बात रखना चाहती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह सिर्फ पब्लिक सिम्पैथी बटोरने का तरीका है, तो कुछ इसे पार्टी के भीतर बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं।

स्मृति ईरानी ने राजनीति में आने से पहले टीवी जगत में नाम कमाया था और फिर राजनीति में भी उन्होंने अमेठी जैसी कठिन सीट से राहुल गांधी को हराकर इतिहास रच दिया था। ऐसे में उनका राजनीतिक अनुभव और जनसंपर्क किसी से कम नहीं है। अगर वे खुलेआम नाराजगी जाहिर कर रही हैं तो यह केवल उनका निजी गुस्सा नहीं बल्कि पार्टी के उस तबके की आवाज हो सकती है जो खुद को अनदेखा महसूस कर रहा है।

हालांकि बीजेपी की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी अंदरखाने में इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्मृति ईरानी पार्टी के भीतर ही अपनी आवाज बुलंद करेंगी या किसी और रास्ते की ओर बढ़ेंगी। राजनीति में कोई भी बदलाव अचानक नहीं होता, लेकिन जब कोई नेता इस तरह से बोलता है, तो इसका असर दूर तक होता है। आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा कि ये बयानबाज़ी एक अस्थायी गुस्सा थी या कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी का संकेत।

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